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जम्मू-कश्मीरः इस महीने दूसरे सप्ताह से शुरू होगा चादर ट्रैक का रोमांच, प्रशासनिक तैयारियां पूरी

Sun, 03 Jan 2021 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 Jan 2021 02:26 AM IST
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The thrill of the Chadar track will start from the second week of January in jammu kashmir
चादर ट्रैक - फोटो : amar ujala

बर्फ से जमी लद्दाख की जंस्कार नदी के सदियों पुराने रूट पर रोमांच और जोखिम भरा एडवेंचर जनवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। कोरोना महामारी के चलते इस बार

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लेह प्रशासन ने पर्यटकों के लिए विशेष हिदायतें जारी की हैं। प्रतिदिन चार ही पर्यटकों के ग्रुप चादर ट्रैकिंग के लिए जा पाएंगे। एक ग्रुप में अधिकतम दस पर्यटकों को अनुमति रहेगी। बीते वर्ष जंस्कार नदी पर जमी बर्फ की चादर अचानक पिघलने से कई पर्यटक फंस गए थे। इस बार प्रशासन ने एहतियातन रेस्क्यू टीमों को सेटेलाइट फोन से लैस करने की तैयारी की है।
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रेस्क्यू के लिए पवन हंस के हेलिकॅप्टर को भी स्टैंडबाई पर रखा गया है। पर्यटकों के लिए बीमा और कोविड निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य रहेगी। ट्रैक पर जाने से 48 घंटे के भीतर करवाई कोविड जांच रिपोर्ट या फिर लेह में पहुंचकर करवाई गई जांच वैध होगी। पहला बैच लेह से जंस्कार के लिए नौ जनवरी को रवाना होगा और यह ट्रैक फरवरी माह के दूसरे सप्ताह तक ट्रैकर्स के लिए खुला रहेगा। बीते वर्ष दो हजार एडवेंचर प्रेमियों ने इस ट्रैक को पूरा किया था। इस साल पर्यटकों की संख्या कम रह सकती है। 
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माइनस 30 से 35 डिग्री रहता है तापमान
बर्फीला रेगिस्तान कहे जाने वाले लद्दाख में लेह और जंस्कार को जोड़ने वाली जंस्कार नदी के सदियों पुराने बर्फ से जमे रूट पर यह ट्रैकिंग की जाती है। इस दौरान बर्फबारी भी होती है। तापमान -35 डिग्री से -30 डिग्री के बीच रहता है। लद्दाख प्रशासन ने जोखिम को देखते हुए जरूरी व्यवस्थाएं की हैं। वन्यजीव विभाग लेह की ओर से भी टूर आपरेटरों और सैलानियों के लिए हिदायतें जारी की गई हैं।

चारों हाल्टिंग स्टेशनों पर रहेंगे चार कैंप लीडर 
प्रशासन की ओर से ट्रैक के चारों हाल्टिंग स्टेशनों पर चार कैंप लीडर नियुक्त रहेंगे। इन सभी जगह पर प्री फेब्रीकेटिड और स्थाई शौचालयों की व्यवस्था भी कर दी गई है। कैंप में पुलिस और वन्यजीव विभाग की टीमें भी तैनात रहेंगी। प्रकृति का ध्यान रखते हुए ट्रैकिंग के दौरान निकलने वाले कचरे को भी पर्यटक साथ ही वापस लेकर आएंगे। एसओपी का पालन न करने पर प्रशासन की ओर से टूर आपरेटरों को जुर्माने या ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश भी जारी हो गए हैं। 

भारतीय के लिए 2 हजार, विदेशियों के लिए 2200 रुपये फीस
टूर आपरेटर्स और पर्यटकों के लिए नियमावली जारी की गई है। इसमें पर्यटकों को लेह में पहले तीन रातें गुजारने, इसके उपरांत मेडिकल चेकअप करवाने और चौथे दिन परमिट हासिल करने के बाद चादर ट्रैक की यात्रा की हिदायत दी गई है। वन्यजीव विभाग लेह के वार्डन पंकज रैना ने कहा कि चादर ट्रैक के लिए परमिट हासिल करने सहित चादर ट्रैक का फी स्ट्रक्चर भी जारी कर दिया गया है। भारतीय नागरिकों को इस बार भी दो हजार रुपये, जबकि विदेशी नागरिकों के लिए 2200 फीस निर्धारित की गई है।

भारत के सबसे अनूठे और चुनौतीपूर्ण ट्रैक में से एक
यहां का अधिकतम तापमान -15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान -35 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क जाता है। इन दिनों लद्दाख के जंस्कार का चादर ट्रैक आकर्षण का केंद्र बनता है, जहां देश के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक जमे हुए झरनों और जंस्कार नदी पर जमी बर्फ पर चलने का रोमांचक अनुभव लेने पहुंचते हैं। चादर ट्रैक को भारत के सबसे अनूठे और चुनौतीपूर्ण ट्रैक में से एक माना जाता है। 


पल-पल बदलता है मौसम, टूटती-बनती नदी पर जोखिम भी कम नहीं 
आम तौर पर छह से आठ दिन का यह ट्रैक जनवरी माह की शुरूआत से लेकर फरवरी माह के अंत और कभी-कभी मौसम अनुकूल रहने पर मार्च तक भी जारी रहता है। हर साल ट्रैकिंग में शामिल होने वाले युवाओं की तादाद अधिक रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार चादर ट्रैक सदियों से स्थानीय लोगों द्वारा खान-पान की व्यवस्था और व्यापार के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। बर्फबारी के बाद लेह से कटने वाले जंस्कार को जोड़ने वाला यह मुख्य रास्ता है। दुर्गम होने के साथ-साथ इस मार्ग पर जान का जोखिम भी है। पल-पल बदलता मौसम हो या फिर टूटती बनती नदी पर जमी बर्फ, इस मार्ग को जोखिम से भर देते हैं। 

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