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जम्मू: अब शारदा लिपि में पढ़ी जाएगी कश्मीर की कहानी, घाटी की पुरानी लिखित परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास
Sat, 17 Oct 2026 02:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गौरव रावत, जम्मू
गौरव रावत, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 17 Oct 2026 02:45 AM IST
सार
शारदालोक के संपादक और कश्मीर अध्ययन केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि पत्रिका में करीब 90 फीसदी सामग्री कश्मीरी भाषा में है। इसे तैयार करने में करीब दो साल लगे।
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विस्तार
कश्मीर की भाषा, साहित्य और ज्ञान परंपरा को सदियों तक सहेजने वाली शारदा लिपि अब नए सिरे से जीवंत हो रही है। इस प्राचीन लिपि में कश्मीरी भाषा की पत्रिका शारदालोक प्रकाशित की गई है। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कश्मीर अध्ययन केंद्र ने सप्तसिंधु फाउंडेशन के सहयोग से इसे तैयार किया है।
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पत्रिका के जरिये शारदा लिपि में समकालीन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ कश्मीर की पुरानी लिखित परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। शारदालोक के संपादक और कश्मीर अध्ययन केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि पत्रिका में करीब 90 फीसदी सामग्री कश्मीरी भाषा में है। इसे तैयार करने में करीब दो साल लगे।
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