फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The Skanda Purana written in Devanagari script on 324 palm leaves.

डोगरा आर्ट म्यूजियम की धरोहर: ताड़ के 324 पत्तों पर देवनागरी में स्कंद पुराण, भविष्य में होगा ऑनलाइन उपलब्ध

Sat, 10 Jan 2026 01:46 PM IST
निकिता गुप्ता एचपी चौहान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
एचपी चौहान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 10 Jan 2026 01:46 PM IST
सार

जम्मू के डोगरा आर्ट म्यूजियम में नौवीं सदी का 324 पत्तों पर लिखा स्कंद पुराण मौजूद है, जिसमें 81,000 से अधिक श्लोक हैं और यह शैव साहित्य का अनमोल ग्रंथ माना जाता है। म्यूजियम में इसे बेहतर संरक्षण के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं और भविष्य में इसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है।

विज्ञापन
The Skanda Purana written in Devanagari script on 324 palm leaves.
ताड़ के पत्तों पर लिखा स्कंद पुराण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू के प्रसिद्ध डोगरा आर्ट म्यूजियम में कई अनमोल धरोहरें हैं लेकिन ताड़ के 324 पत्तों पर लिखा स्कंद पुराण बेहद खास है। यह पांडुलिपि नौवीं सदी की है। शीशे के बॉक्स में काफी करीने से रखे इस पुराण को दशकों तक और सुरक्षित रखने के लिए प्रयास शुरू हो गया है।

विज्ञापन


देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1954 में डोगरा आर्ट म्यूजियम का उद्घाटन किया था। म्यूजियम के पांडुलिपि सेक्शन में 694 बेशकीमती पांडुलिपियां मौजूद हैं। इन सबके बीच देवनागरी लिपि में लिखित स्कंद पुराण दर्शकों को आकर्षित करता है।
विज्ञापन


यह इसलिए भी खास है क्योंकि 324 पत्तों पर 81,000 से ज्यादा श्लोक लिखे गए हैं। यह शैव साहित्य का हिस्सा है जिसमें शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का बखान है। कार्तिकेय को स्कंद नाम से भी जाना जाता है। 18 हिंदू पुराणों में से स्कंद पुराण सबसे बड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बेहतर संरक्षण का शुरू हुआ प्रयास, ऑनलाइन भी होगा
म्यूजियम के प्रभारी मुकुल मंगोत्रा बताते हैं कि स्कंद पुराण को शीशे के बॉक्स में सुरक्षित रखने के लिए सिलिका जेल और कीटाणुनाशक रसायन का छिड़काव किया गया है। इसे बेहतर ढंग से दशकों तक सुरक्षित रखने के लिए कश्मीर यूनिवर्सिटी के आर्कियोलाॅजी डिपार्टमेंट से मदद लेने की बात चल रही है। इसे ऑनलाइन किया जाएगा ताकि देश-विदेश में कहीं से कोई भी इसे देख और पढ़ सके। 

मुल्ला मसीह की लिखी रामायण, महाभारत और पांडवगीता भी यहां मौजूद कश्मीर के प्रसिद्ध स्थलों का वर्णन करने वाली भोजपत्र पर शारदा लिपि में लिखित पांडुलिपि भी म्यूजियम में रखी हुई है। फारसी में मुल्ला मसीह लिखित 18वीं सदी की रामायण, भागवत पुराण, महाभारत, पांडवगीता और लंकाकांड समेत अन्य ग्रंथ भी मौजूद हैं।

स्कंद पुराण को माना जाता है जीवंत ग्रंथ
स्कंद पुराण नाम का मूल ग्रंथ संभवतः 8वीं सदी तक मौजूद था। समय के साथ यह अनेक संस्करणों और पाठों में विभाजित हो गया। इसे एक जीवंत ग्रंथ माना जाता है जिसका कई शताब्दियों में व्यापक संपादन हुआ है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed