{"_id":"61c3cffe1efb45489119ab54","slug":"the-political-equation-of-jammu-and-kashmir-will-change-with-the-seats-reserved-for-st","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर : एसटी के लिए आरक्षित नौ सीटों से बदलेंगे सूबे के सियासी समीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर : एसटी के लिए आरक्षित नौ सीटों से बदलेंगे सूबे के सियासी समीकरण
Thu, 23 Dec 2021 06:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
बृजेश सिंह, जम्मू
बृजेश सिंह, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 23 Dec 2021 06:55 AM IST
सार
पहली बार आरक्षित सीटों के लिए भाजपा, कांग्रेस, नेकां, पीडीपी, अपनी पार्टी सभी लगाएंगे जोर। भाजपा पहाड़ी भाषियों को एसटी का दर्जा देकर इन सीटों पर दबदबा कायम करने की जुगत में है।
विज्ञापन
गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए पहली बार नौ सीटों को आरक्षित करने का प्रस्ताव सूबे की सियासत के लिए नए समीकरण लेकर आएगा। पहाड़ी क्षेत्रों की इन सीटों में राजोरी व पुंछ में दो-दो, रियासी में एक सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है, वहीं कश्मीर संभाग में गांदरबल, अनंतनाग, कुलगाम व कुपवाड़ा में एक-एक सीट आरक्षित हो सकती है।
विज्ञापन
सीटों का यह आरक्षण सूबे के चुनावी समीकरण को बदल सकता है। भाजपा पहाड़ी भाषियों को एसटी का दर्जा देकर इन सीटों पर अपना परचम लहराने की रणनीति पर काम कर रही है। भगवा ब्रिगेड का आकलन है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो एसटी सीटों के जरिये ही कश्मीर में कमल खिल सकता है।
विज्ञापन
पहाड़ी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती है। यहां नेकां व पीडीपी मजबूत स्थिति में हैं। भाजपा के रणनीतिकार बताते हैं कि पार्टी ने एक-एक सीट का गणित बनाया है ताकि विधानसभा में उसे बहुमत मिल सके। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों की नौ सीटें अहम हैं। पार्टी पुंछ व राजोरी की कुल आठ सीटों (पहले सात सीटें थी, राजोरी में एक सीट बढ़ाने का प्रस्ताव है) पर अपना दबदबा कायम करना चाहती है।
विज्ञापन
इसके लिए जमीनी स्तर पर पहाड़ियों के बीच पैठ बनाने का काम चल रहा है। इन्हें एसटी का दर्जा देने की भी तैयारी की जा रही है ताकि उन्हें अपने पाले में किया जा सके। पहाड़ी भाषियों का वोट बैंक आरक्षित सीटों के साथ ही अन्य सीटों पर भी असर डालेगा।
एससी का रोटेशन लाएगा बदलाव
अनुसूचित जाति की सीटों का रोटेशन भी प्रदेश की राजनीति में बदलाव लाएगा। लंबे समय से आरक्षित सीटों-आरएस पुरा, रायपुर दोमाना व छंब (जम्मू), हीरानगर (कठुआ), सांबा, चिनैनी (उधमपुर) का रोटेशन बदल जाएगा और अब वे सामान्य हो जाएंगे। इनकी जगह पर जम्मू में बिश्नाह, मढ़ व अखनूर, उधमपुर में रामनगर, कठुआ जिले में कठुआ, सांबा में रामगढ़ और राजोरी में नौशेरा को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जा सकता है।
यह सीटें जा सकती हैं एसटी के खाते में
राजोरी जिले में दरहाल व राजोरी, पुंछ में सुरनकोट व मेंढर, रियासी में गुलाबगढ़, गांदरबल, कोकरनाग (अनंतनाग), गुरेज (कुपवाड़ा) व नूराबाद (कुलगाम)।
सभी पार्टियां गदगद
भाजपा, अपनी पार्टी, पीडीपी और नेकां की ओर से राजोरी-पुंछ को पिछले दिनों राजनीति का केंद्र बनाया गया। इन सभी पार्टियों ने रैलियां कीं, जिसमें पहाड़ियों की अच्छी तादाद में मौजूदगी रही। इससे ये दल खुश हैं। भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना है कि पार्टी पहाड़ियों को उनके हक व अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। अपनी पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी के अनुसार रैलियों में उमड़ी भीड़ से यह लगता है कि जनता मौजूदा व्यवस्था से परेशान है।