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हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 19 Jul 2015 02:00 AM IST
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रिट कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एलपीए की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को रियासत के बाहर मेडिकल कालेज में एमबीबीएस कोर्स के लिए सीट प्रदान की जाए। नियमों के अनुसार याचिकाकर्ता ओवासिस महमूद का सत्र 2015-16 के लिए सेंट्रल पूल से मिली सीट पर हक बनता है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि प्रतिवादी ओवासिस महमूद को सीट देने में असफल रहता है तो रियासत के मुख्य सचिव याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये अदा करें। जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने प्रतिवादी को दो सप्ताह में सभी कार्यवाही पूरी करने के लिए कहा है।
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रिट कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने कहा था कि एमबीबीएस कोर्स के सेंट्रल पूल में उसे दूसरा स्थान मिला है इसलिए उसे नियमानुसार रियासत के बाद एनसीसीबी मेडिकल कालेज (मध्य प्रदेश) या दरभंगा मेडिकल कालेज (बिहार) में कोर्स करने की इजाजत दी जाए।
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याचिकाकर्ता ने उस आदेश को भी रद्द करने की मांग की, जिसमें प्रतिवादी ने आरे से उनका नाम हटा दिया और तीसरे नंबर पर रहने वाली आनंदिया राजदान का नाम शामिल कर लिया। खंडपीठ ने गौर करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को नियम अनुसार एमबीबीएस कोर्स की अनुमति मिलनी चाहिए।
मामले में विस्थापन के बाद सरकार का फर्ज बनता है कि विस्थापित को बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस केस में भी केंद्र सरकार ने सेंट्रल पूल से उन परिवार के बच्चों को एमबीबीएस सीट देने की व्यवस्था की है, जो 1989-90 में कश्मीर से विस्थापित हुए। जेएनएफ