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जहां हर कदम मौत के करीब था: चार टोलियां, बदली चाल और दुश्मन पर जीत, बाना सिंह ने सोनम पोस्ट की सुनाई वीरगाथा

Tue, 06 Jan 2026 11:34 AM IST
निकिता गुप्ता महेंद्र तिवारी अमर उजाला
महेंद्र तिवारी अमर उजाला Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 06 Jan 2026 11:34 AM IST
सार

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन (सेवानिवृत्त) बाना सिंह ने ऑपरेशन मेघदूत के दौरान सियाचिन की सोनम पोस्ट पर कब्जे की बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को साझा किया, जहां 62 जवानों को पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर को 400 बार उड़ान भरनी पड़ी। कड़ी बर्फबारी, ऑक्सीजन की कमी और भारी नुकसान के बावजूद भारतीय सेना ने रणनीति बदलकर पोस्ट पर कब्जा किया और वहां तिरंगा फहराया।

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The helicopter flew 400 times to reach Sunam Post.
कैप्टन बाना सिंह ऑपरेशन मेघदूत और सुनम पोस्ट के अनसुने किस्से सुनते हुए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन (सेवानिवृत्त) बाना सिंह ने ऑपरेशन मेघदूत के चुनाैतीपूर्ण लेकिन यादगार लम्हों को साझा किया। वे बताते हैं कि वहां ऑक्सीजन की कमी व दुर्गम परिस्थितियों में 62 लोगों को सियाचिन के सुनम पोस्ट तक पहुंचाने के लिए हेलिकाॅप्टर को 400 बार उड़ान भरनी पड़ी थी।

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उन्होंने कहा कि सुनम से कायदे आजम पोस्ट देखने से लगता था कि ये ऊपर दिख रही पहाड़ी पर ही तो है। सुनम से तीन-चार घंटे में चढ़ जाएंगे। 8 बजे चढ़ाई शुरू की लेकिन तड़के 4 बजे तक 150 मीटर भी नहीं चढ़ पाए। इतनी बर्फबारी, इतनी कठिनाई कि कहना मुश्किल। आखिरकार लाैट आए। सीओ ने दूसरे दिन अफसरों व जेसीओ को बुलाया और हाैसलाअफजाई की। संकल्प अडिग था। कहा कि हम सभी 62 जवानों की जान भले चली जाए लेकिन पोस्ट पर कब्जा चाहिए। 800 जवान इस काम में आने के लिए पीछे से तैयार बैठे हैं।
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उन्होंने कहा कि पूरी टीम के लिए यह गाैरव का लक्ष्य था। इसी दिन के लिए सैनिक जीता है। सबमें जोश भर गया। टीम ने रणनीति बदली। चार टोली बनाई और चढ़ाई शुरू कर दी। हमारे कई साथी हताहत हुए लेकिन हमने पाकिस्तानियों को मारकर पोस्ट पर कब्जा कर लिया। भारत का झंडा फहरा दिया। वह बड़ी विनम्रता से कहते हैं कि देश ने सम्मान में उस पोस्ट का नाम बाना सिंह पोस्ट कर दिया। यह देश का बड़प्पन है।

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पूर्व सैनिकों का अच्छा ख्याल रख रही सरकार
बाना सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार पूर्व सैनिकों का अच्छा ख्याल रख रही है। सेना के बड़े अधिकारी समय-समय पर हालचाल लेते रहते हैं। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों के परिवारों का भी बेहतर ख्याल रखा जा रहा है। उनके परिवार की चिंता की जा रही है। वह कहते हैं कि पूर्व सैनिकों के परिवारों से लगातार नए सदस्य इस सेवा में जुड़ रहे हैं। यह अच्छा संकेत है।

वीरता का सर्वोच्च प्रदर्शन तो विनम्रता भी अनुकरणीय
बाना सिंह ने वीरता में ही सर्वोच्च प्रदर्शन नहीं किया, उनकी विनम्रता भी अनुकरणीय है। अत्यंत दुर्गम सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय पोस्ट को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने की रूह कंपा देने वाली कहानी सुनाते हुए उनकी आंखों की चमक बढ़ जाती है। वह न सिर्फ अपने कमांडर चंदन सिंह नाैग्याल को याद करते हैं बल्कि यह भी बताना नहीं भूलते कि उनकी पलटन में 2 ऑफिसर, 3 जेसीओ व 57 अन्य रैंक (ओआर) के कुल 62 जवान थे। वह अपने कई साथी जवानों की वीरगति को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं।

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