लाल चौक की रौनक लुटी, कारोबार ठप
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लाल चौक को ग्रीष्मकालीन राजधानी की धड़कन कहा जा सकता है लेकिन सैलाब ने इसकी रौनक पर डाका डाल दिया। पहले पानी उतरा और अब कचरा भी हटा दिया गया है लेकिन रंगीनी कहीं नहीं दिखती। चहल-पहल गायब है।
फैशन बाजार के रूप में मशहूर लेम्बर्ट लेन में भूतहा सन्नाटा है। दुकानदार अब तक नुकसान के जोड़-घटाव में ही उलझे हैं। जहांगीर चौक से लाल चौक तक के व्यस्ततम इलाके की रौनक वापसी के लिए व्यापारी कयास लगाते नजर आते हैं।
कोई कहता है कि फिर से चहल-पहल में छह महीने लग जाएंगे तो कोई इस अवधि को तीन माह का बताता है।
पहचान छिपाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला
व्यापार के इस हब का सियासी महत्व भी कम नहीं है। इस चौक पर तिरंगा फहराने के लिए कई बार देशव्यापी मुहिम छेड़ी गई। लाल चौक को अलगाववादियों के प्रभाव क्षेत्र वाला इलाका माना जाता है। सैलाब के दिनों में सेना को भी इस जगह पर फंसे लोगों को बाहर निकालने के क्रम में मुश्किलें झेलनी पड़ी थी। सेना के जवानों ने भेष बदलकर और पहचान छिपाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला।
सैलाब का पानी एक मंजिल को पूरी तरह डुबो गया था। दुकानों के अंदर पानी और कचरे ने पखवाड़े तक स्थायी डेरा बनाए रखा। पानी उतरने के बाद कचरे की सफाई में सप्ताह भर से अधिक का वक्त लग गया। कारोबार में रफ्तार आने की उम्मीद अभी तक नहीं जगी है।
'कितना नुकसान हुआ कुछ नहीं कह सकते'
लाल चौक के टावर के ठीक सामने त्रिलोक सिंह एंड संस की ग्लास और हार्डवेयर की दुकान है। इस दुकान के मालिक अनूप सिंह कहते हैं कितना नुकसान हुआ कुछ नहीं कह सकते। सात दिन की सफाई में दुकान के एक कोने के सामान को ही ठीक तरीके से देखा जा सका। सर्दियों का बाजार भी लुट चुका है।
चहल-पहल लौटने में कम से कम छह माह लगेंगे। अनूप सिंह का घर जवाहर नगर में है, जहां पानी दो मंजिल तक पहुंच गया था। पानी ने गरीब-अमीर का फर्क मिटा दिया। करोड़पति लोगों ने उधार मांगकर कपड़े पहने और दो रोटी के लिए घंटों लाइन में खड़े रहे। अरबों-खरबों का नुकसान हुआ है।
कीचड़ में सोना भी काला हो गया
शाह ज्वैलरी शाप के फैयाज अहमद शाह कहते हैं कि उन्हें कम से कम 60 लाख का नुकसान हुआ है। दुकान में रखी ज्वैलरी पानी और कीचड़ से काली हो गई। सोना काला हो गया। नए सिरे से मेटलों की फिनिशिंग करनी पडे़गी। सरकार अभी भी मस्त है। कोई सरकारी मुलाजिम पूछने तक नहीं आया।
अब बच्चे सामान कहां से खरीदेंगे
मुश्ताक ड्रेसेज के मालिक मुश्ताक कहते हैं कि लाल चौक में पचास फीसदी दुकानों के इंश्योरेंस नहीं हैं। वैसे दुकानदारों की पूरी पूंजी ही चली गई। बट क्लाथ हाउस में ताला लटक रहा है। मम्मी प्लीज के नाम से बने बच्चों के सामानों की एक दुकान के अंदर से तबाही झांकती नजर आती है।