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Jammu Kashmir: आतंकवाद मामले में तीन आरोपियों को झटका, अदालत ने डिफॉल्ट जमानत याचिका की खारिज
Fri, 06 Mar 2026 01:09 PM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Nikita Gupta
Updated Fri, 06 Mar 2026 01:09 PM IST
सार
आतंकवाद से जुड़े एक मामले में जम्मू की अदालत ने तीन आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने आरोपपत्र गिरफ्तारी के 178 दिनों के भीतर दाखिल कर दिया था, इसलिए आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं बनता।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
आतंकवाद से जुड़े एक मामले में अदालत ने तीन आरोपियों की ओर से दायर डिफाॅल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी। जम्मू के तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एनआईए अधिनियम की धारा 22 के तहत नामित न्यायालय) मदनलाल ने कहा कि आरोपपत्र उनकी गिरफ्तारी के 178 दिनों के भीतर दायर किया गया था, इसलिए उन्हें अविभाज्य डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं बनता है।
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याचिका आरोपी सुफैन (अमा नाल), कठुआ निवासी राइज एवं यूनुस अहमद दोनों पुत्र मोहम्मद लतीफ और उसकी पत्नी मेमा की ओर से दाखिल की गई थी। उनका कहना था कि उन्हें बीती 28 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उनका आरोप था कि जांच एजेंसी ने केवल उनके अधिकार को विफल करने के लिए एक अधूरा आरोप पत्र दायर किया था, जिसे धारा 187 बीएनएसएस के साथ पढ़ा जाता है।
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यूएपीए मामलों में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने की अधिकतम सीमा को नियंत्रित करता है। एसआईए ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपपत्र बीती 22 अक्तूबर को गिरफ्तारी की तारीख से अनुमत अवधि 178 दिन के भीतर प्रस्तुत किया गया था। एजेंसी ने कहा कि जहां तक आवेदकों का संबंध है, जांच पूरी हो चुकी है और मारे गए/फरार आतंकवादियों से लिंक के संबंध में आगे की जांच यदि आवश्यक हो तो धारा 193(8) बीएनएसएस के तहत पूरक आरोपपत्र के माध्यम से की जाएगी। जेएनएफ
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