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आतंकवादियों ने बीडीसी के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह को बनाया निशाना, गोलीबारी में हुई मौत
Wed, 23 Sep 2020 10:49 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 23 Sep 2020 10:49 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : साकिब नबी
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मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के खाग इलाके में आतंकियों ने ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के निर्दलीय चेयरमैन भूपेंद्र सिंह की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी और फरार हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
घटना के बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। इलाके में सुरक्ष बढ़ा दी गई है और आसपास के इलाकों में हमलावरों की तलाश की जा रही है। फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। भूपेंद्र सिंह के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां व एक बेटा है। फिलहाल उनका परिवार जम्मू में रह रहा है।
कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने अमर उजाला को बताया कि बुधवार की शाम लगभग 7.45 बजे बीडीसी चेयरमैन भूपेंद्र बडगाम जिले के अपने पैतृक गांव दालवाश पहुंचे थे। उसी समय उनके घर में ही छिपे आतंकियों ने उन पर गोलियां चला दीं, गोलियां लगते ही वह वहीं गिर पड़े और आतंकी भाग निकले। बताया जाता है कि गोलियां इतने नजदीक से मारी गई थीं कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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आईजीपी ने बताया कि भूपेंद्र सिंह को बडगाम जिला पुलिस की ओर से दो पीएसओ (पुलिस कर्मी) दिये गए थे, लेकिन बडगाम से श्रीनगर के अलूची बाग स्थित अपने घर रवाना होने से पहले दोनों को जिला पुलिस लाइन में छोड़ दिया। इस बीच बिना पुलिस को जानकारी दिए वह अपने पैतृक गांव दालवाश चले गए जहां उनपर आतंकियों ने हमला कर दिया।
बौखला गए हैं आतंकी
घटना के तुरंत बाद यह अफवाह फैल गई कि भूपेंद्र सिंह भाजपा से संबद्ध थे, लेकिन भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि भूपेंद्र भाजपा से नहीं जुड़े थे। हालांकि इस निर्मम हत्या की वह निंदा करते हैं। कश्मीर में हालात सामान्य होते देख आतंकी बौखलाए हुए हैं इसलिए वह ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से दूर रख कश्मीर में विकास की दौड़ पर ब्रेक लगाना चाहते हैं।
भाजपा सरपंच की पिछले माह हुई थी हत्या
इससे पहले भी कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पंच और सरपंचों की आतंकी हत्य कर चुके हैं। इसी वर्ष पांच अगस्त को कुलगाम में आतंकियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जुलाई महीने में भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी।
वहीं इस घटना के एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी। घाटी में जम्हूरियत की मजबूती में जुटे नेताओं से लेकर पंचायती नुमाइंदों पर पहले भी आतंकी हमले होते रहे हैं।
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घटना के बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। इलाके में सुरक्ष बढ़ा दी गई है और आसपास के इलाकों में हमलावरों की तलाश की जा रही है। फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। भूपेंद्र सिंह के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां व एक बेटा है। फिलहाल उनका परिवार जम्मू में रह रहा है।
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कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने अमर उजाला को बताया कि बुधवार की शाम लगभग 7.45 बजे बीडीसी चेयरमैन भूपेंद्र बडगाम जिले के अपने पैतृक गांव दालवाश पहुंचे थे। उसी समय उनके घर में ही छिपे आतंकियों ने उन पर गोलियां चला दीं, गोलियां लगते ही वह वहीं गिर पड़े और आतंकी भाग निकले। बताया जाता है कि गोलियां इतने नजदीक से मारी गई थीं कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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आईजीपी ने बताया कि भूपेंद्र सिंह को बडगाम जिला पुलिस की ओर से दो पीएसओ (पुलिस कर्मी) दिये गए थे, लेकिन बडगाम से श्रीनगर के अलूची बाग स्थित अपने घर रवाना होने से पहले दोनों को जिला पुलिस लाइन में छोड़ दिया। इस बीच बिना पुलिस को जानकारी दिए वह अपने पैतृक गांव दालवाश चले गए जहां उनपर आतंकियों ने हमला कर दिया।
बौखला गए हैं आतंकी
घटना के तुरंत बाद यह अफवाह फैल गई कि भूपेंद्र सिंह भाजपा से संबद्ध थे, लेकिन भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि भूपेंद्र भाजपा से नहीं जुड़े थे। हालांकि इस निर्मम हत्या की वह निंदा करते हैं। कश्मीर में हालात सामान्य होते देख आतंकी बौखलाए हुए हैं इसलिए वह ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से दूर रख कश्मीर में विकास की दौड़ पर ब्रेक लगाना चाहते हैं।
भाजपा सरपंच की पिछले माह हुई थी हत्या
इससे पहले भी कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पंच और सरपंचों की आतंकी हत्य कर चुके हैं। इसी वर्ष पांच अगस्त को कुलगाम में आतंकियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जुलाई महीने में भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी।
वहीं इस घटना के एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी। घाटी में जम्हूरियत की मजबूती में जुटे नेताओं से लेकर पंचायती नुमाइंदों पर पहले भी आतंकी हमले होते रहे हैं।