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बारामुला मुठभेड़ : लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े थे मारे गए आतंकवादी

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tererist attack
- ब्रिगेडियर दीपक मोहन ने कहा - राफियाबाद में दो पाकिस्तानी दहशतगर्दों का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता
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- उस्मान 2020 से कश्मीर घाटी में था सक्रिय
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। वर्ष 2024 में अब तक के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर समेत उत्तरी कश्मीर में सुरक्षाबलों की आतंकियों के साथ नौ मुठभेड़ हुई हैं। बुधवार को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के राफियाबाद (सोपोर) में मारे गए दोनों पाकिस्तानी आतंकी लश्कर-ए ताइबा से जुड़े थे। बुधवार को इस क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के साथ कुल दो बड़ी मुठभेड़ में चार पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया गया है। जबकि एक दहशतगर्द घुसपैठ के दौरान उड़ी सेक्टर में मारा गया था।
राफियाबाद में वीरवार को प्रेसवार्ता में सेक्टर-7 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के कमांडर ब्रिगेडियर दीपक मोहन ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से राफियाबाद में आतंकवादियों की मौजूदगी के इनपुट मिल रहे थे। 19 जून को जम्मू-कश्मीर पुलिस को हादीपोरा, राफियाबाद में एक घर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली। इसके बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त अभियान शुरू किया। मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। मारे गए दोनों आतंकवादी लश्कर के थे। इनकी शिनाख्त उस्मान और उमर के रूप में की गई है। उस्मान 2020 से कश्मीर घाटी में सक्रिय था। मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। ब्रिगेडियर ने कहा, दोनों आतंकवादियों का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता है। सैन्य अधिकारी के साथ उत्तरी-कश्मीर के डीआईजी पुलिस विवेक गुप्ता और एसएसपी सोपोर दिव्या डी के साथ अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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उत्तरी कश्मीर में फिर आतंकवाद को जिंदा
करने की साजिश रच रहा पाकिस्तान
इससे पहले 25 अप्रैल को सोपोर के नौगाम में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल वहाब और सनान जफर मारे गए थे। ये भी लश्कर से जुड़े थे। सूत्रों के अनुसार, अब्दुल वहाब के मारे जाने के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आईएसआई ने एक बड़ी सभा बुलाई थी, जिसमें लश्कर के साथ-साथ जैश के आतंकी आकाओं की उपस्थिति भी देखी गई थी। उत्तरी कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों का मारा जाना इस बात की तरफ इशारा दे रहा है कि पड़ोसी मुलक उत्तरी कश्मीर में फिर से आतंकवाद को सक्रिय करने की साजिश रच रहा है। जैसा यह क्षेत्र 2005 से 2015 तक था। हालांकि 2019 में जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक मुहिम के तहत बारामुला जिले को आतंकी मुक्त घोषित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी मूल के विदेशी आतंकियों की संख्या अभी स्थानीय आतंकियों से ज्यादा है, लेकिन इनका सफाया किया जा रहा है।
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कश्मीर में बीते छह माह में हुईं मुठभेड़
- पांच जनवरी : शोपियां के चोटीगाम में मुठभेड़, लश्कर का एक स्थानीय आतंकी ढेर।
- पांच अप्रैल : उड़ी सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, एक विदेशी आतंकी मारा गया।
- 11 अप्रैल : पुलवामा मुठभेड़, एक स्थानीय आतंकी ढेर।
- 25 अप्रैल : सोपोर में मुठभेड़, दो पाकिस्तानी आतंकी मारे गए।
- छह मई : कुलगाम के रेडविनी पाइन में मुठभेड़, तीन स्थानीय आतंकी मारे गए।
- तीन जून : पुलवामा के निहामा में मुठभेड़, दो स्थानीय आतंकियों को मार गिराया।
- 17 जून : बांदीपोरा अरगाम मुठभेड़, एक स्थानीय आतंकी ढेर
- 19 जून : सोपोर के रफियाबाद में मुठभेड़, 2 पाकिस्तानी आतंकी ढेर
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