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यहां शिक्षक होना गुनाह है, पढ़ें पूरा मामला

Mon, 20 Apr 2015 08:35 PM IST
Updated Mon, 20 Apr 2015 08:35 PM IST
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teachers in jammu kashmir in worst conditions

कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे अस्थायी शिक्षकों के एक शिष्टमंडल ने उपमुख्यमंत्री के कार्यालय के बाहर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। अस्थायी शिक्षकों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री भी मांग को पूरा करने के बजाय केवल झूठे आश्वासन दे रहे हैं, इसलिए मजबूर होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

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प्रेस क्लब के बाहर 39वें दिन भूख हड़ताल करने वाली चार महिला अस्थायी शिक्षिकाएं थीं। 31 मार्च से खत्म हुआ कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर पूरे राज्य के अस्थायी शिक्षक प्रेस क्लब के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
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दोपहर करीब तीन बजे प्रधान बलविंद्र सिंह पवार के नेतृत्व में शिक्षकों का एक शिष्टमंडल उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह के कार्यालय के बाहर पहुंचा और कार्यकाल बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन उप मुख्यमंत्री टाल-मटोल करते ही नजर आए। इसी से मजबूर होकर सभी को कार्यालय के बाहर उप मुख्यमंत्री के ही खिलाफ प्रदर्शन करना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल तक सभी शिक्षक सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं। अगर 24 तक मांग को पूरा नहीं किया तो सभी दिल्ली जाकर प्रदर्शन करेंगे।

बिना वेतन आरईटी शिक्षकों को रोटी के लाले

teachers in jammu kashmir in worst conditions

करीब आठ महीने से आरईटी शिक्षकों को वेतन न मिलने से रोटी के लाले होने लगे हैं। राज्य और केंद्र सरकार वेतन जारी करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। प्रदर्शन करने पर पुलिस आरईटी शिक्षकों पर लाठियां बरसा रही है। अब लगता है कि अगर वेतन नहीं मिला तो आरईटी शिक्षकों के पास आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ेगा।

यह बातें सोमवार को जेएंडके आरईटी फोरम के राज्य प्रधान विनोद शर्मा ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। विनोद शर्मा ने कहा कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत आरईटी शिक्षकों को वेतन मिलता है, लेकिन इस बार करीब आठ महीने से आरईटी शिक्षक वेतन से महरूम हैं। शिक्षक कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं।

परिवार की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो चुका है। उनकी एक बार फिर सरकार से अपील है कि रोका गया वेतन जल्द से जल्द जारी करके परेशानी को दूर किया जाए।

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