फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Target killing becomes a challenge for security agencies hybrid terrorist network will have to be dismantled

Target Killing : ताबड़तोड़ हत्याओं से दहला कश्मीर, घाटी के सवा लाख हिंदुओं को डराने की नापाक साजिश

Fri, 03 Jun 2022 04:55 AM IST
विजय पुंडीर बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 03 Jun 2022 04:55 AM IST
सार

कश्मीर में शांति पाकिस्तानी आकाओं को चुभ रही। अब बरगलाने के बाद भी युवा जल्दी हथियार और पत्थर उठाने को तैयार नहीं हो रहा। ऐसे में पाकिस्तान ने आखिरी दांव खेलते हुए टारगेट किलिंग को हथियार बनाया। खौफ पैदा करने के लिए अल्प संख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जाने लगा है। सुरक्षा एजेंसियां तथा खुफिया एजेंसियां घाटी में सक्रिय हैं, फिर भी टारगेट किलिंग रुक नहीं रही है।  

विज्ञापन
Target killing becomes a challenge for security agencies hybrid terrorist network will have to be dismantled
आतंकवादी डेमो। - फोटो : social media

विस्तार

कश्मीर में रह रहे सवा लाख हिंदू पाकिस्तान को खटक रहे हैं। इनमें एक लाख के करीब घाटी के विभिन्न हिस्सों में रह रहे प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद अलगाववादियों का खेल खत्म हो गया। पत्थरबाज दूर रहने लगे। सुरक्षा बलों की सख्ती से स्थानीय आतंकी भी किनारा करने लगे हैं। ऐसे में पाकिस्तान को पिछले तीन दशकों की आतंकी फसल के नष्ट होने का खतरा सताने लगाने है। इस खेती को हरा-भरा रखने के लिए अब उसने टारगेट किलिंग का आखिरी दांव खेला है।

विज्ञापन


मकसद घाटी में अशांति रहे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान केंद्रित हो सके कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य नहीं है। कश्मीरी पंडितों की वापसी प्रक्रिया को भी खराब माहौल की आड़ में बाधित किया जा सके। सरकार ने सुरक्षित माहौल बनाने तथा विश्वास बहाली के लिए पिछले दिनों खोले गए पोर्टल के जरिये उनकी जमीनों से कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। टारगेट किलिंग से इसे बाधित करने की साजिश है। सुरक्षा बलों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि टारगेट किलिंग चुनौती बन गई है। इसमें शामिल ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) तथा हाइब्रिड आतंकियों के नेटवर्क का सफाया करने के लिए अभियान चलाया गया है। जल्द ही सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।
विज्ञापन

 
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद ढाई साल से अधिक समय में पाकिस्तान को अपने सभी दांव उलटे पड़ते नजर आए। कश्मीर में माहौल सामान्य होने लगा। अलगाववादी गायब हो गए। जमात-ए-इस्लामी की गतिविधियां लगभग ठप पड़ गईं। आतंकी घटनाओं और पत्थरबाजी में कमी आई। पर्यटन बढ़ा और आर्थिक गतिविधियां तेजी से रफ्तार पकड़ने लगी। घाटी में युवा अब पत्थर और बंदूक छोड़कर आत्मनिर्भर बनने और करिअर पर फोकस करने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में कश्मीर में शांति पाकिस्तानी आकाओं को चुभ रही। अब बरगलाने के बाद भी युवा जल्दी हथियार और पत्थर उठाने को तैयार नहीं हो रहा। ऐसे में पाकिस्तान ने आखिरी दांव खेलते हुए टारगेट किलिंग को हथियार बनाया। खौफ पैदा करने के लिए अल्प संख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जाने लगा है। इनमें कश्मीरी पंडित कर्मचारी से लेकर शिक्षक, बैंककर्मी, राजपूत बिरादरी, प्रवासी मजदूर शामिल रहे। सूत्र बताते हैं कि इन सबके लिए ओवर ग्राउंड वर्करों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जो स्थानीय हैंडलरों से मिले टारगेट को हिट करते हैं। सीमा पार से घाटी में सक्रिय हैंडलरों को टारगेट बताया जा रहा है। यह हैंडलर हाइब्रिड आतंकियों तथा ओजीडब्ल्यू के जरिये टारगेट को निशाना बनाते हैं।

आतंकवाद के दौर में भी घाटी न छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के संजय टिक्कू कहते हैं कि कश्मीर में रहने वाले हिंदुओं में जबर्दस्त भय व दहशत का माहौल है। नब्बे से भी खराब हालात बनाने की साजिश है। चरम आतंकवाद में भी दो घटनाओं को छोड़कर कार्यालय व दुकानों में लोगों की हत्या नहीं की गई थी, लेकिन अब तो दुकान व कार्यालयों में हत्या आम हो गई है। सरकार को नियमित रूप से ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को ध्वस्त करना चाहिए। साथ ही हिंदू समाज में सुरक्षा का भाव पैदा करना चाहिए ताकि वे घाटी न छोड़ें और नापाक साजिश ध्वस्त हो सके।


तमाम एजेंसियां सक्रिय, फिर भी घटना सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती
जानकार बताते हैं कि कश्मीर में पीएम पैकेज के साढ़े पांच हजार कर्मचारी रह रहे हैं। आतंकवाद के दौर में भी घाटी न छोड़ने वाले साढ़े तीन हजार, राजपूत तीन हजार हैं। इनके अलावा गैर कश्मीरी सरकारी मुलाजिम और निजी कार्यालयों में काम करने वाले मुलाजिमों की संख्या भी तकरीबन दस हजार है। सरकारी स्कूलों में अनुसूचित जाति के तहत नियुक्त शिक्षक भी तीन हजार के आसपास हैं। ऐसे में कुल मिलाकर सवा लाख से अधिक हिंदू कश्मीर के विभिन्न जिलों में रह रहे हैं। लगभग 65 हजार सिख भी घाटी में हैं। पीस फोरम के अध्यक्ष सतीश महालदार बताते हैं कि घाटी से हिंदुओं का पलायन केंद्र सरकार व भाजपा के लिए हार होगी। अमरनाथ यात्रा को बाधित करने की साजिश के तहत भी कश्मीर में ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि तमाम सुरक्षा एजेंसियां तथा खुफिया एजेंसियां घाटी में सक्रिय हैं, फिर भी टारगेट किलिंग रुक नहीं रही है। यह सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed