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बार्डर LIVE: जहां पाक के मोर्टार से मौत को गच्चा देने को मिलते हैं सिर्फ 25 सेकेंड

Fri, 07 Oct 2016 07:58 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 07 Oct 2016 07:58 PM IST
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story of villagers at line of control
सीमा पर तैनात जवान - फोटो : File Photo
एलओसी के पास एक गांव में सन्नाटा है। तमाम घर खाली हैं। युवाओं की उदास सी हलचल नजर आती है जो मवेशियों को चारा डालने या फिर खेत में बर्बाद फसल की कटाई के लिए जोखिम उठा रहे हैं। एलओसी पार से धमाके की आवाज होती है तो 25 सेकेंड के भीतर सभी सुरक्षित स्थान को भागते हैं। सुरक्षित ओट न मिले तो जहां हैं वहीं पर लेटकर जान बचाते हैं।
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पलांवाला सेक्टर में पाकिस्तान की तीन पोस्टों से होने वाली गोलाबारी की रेंज वाले छन्न दवानो गांव की जिंदगी रोज इसी जोखिम में बीत रही है । गांव के युवा बहादुर सिंह, दिलावर सिंह और रविंदर सिंह बताते हैं कि 42 कुनबों वाले गांव में एक भी घर पूरे परिवार के साथ नहीं रह रहा।
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बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों को जा चुके हैं। बुधवार को भीषण गोलाबारी हुई थी। इससे पहले भी रुक रुक कर गोले बरस रहे हैं। घर के कुछ युवाओं को ही यहां आकर माल मवेशियों और फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है।
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​पाकिस्तान कर रहा चीन निर्मित 82 एमएम मोर्टार का इस्तेमाल

story of villagers at line of control
सीमा पर तैनात जवान - फोटो : File Photo

कुछ मवेशी मोर्टार की जद में आकर मारे जा चुके हैं। उन्होंने बताया गांव में 100 एकड़ से अधिक भूमि में माश की फसल तैयार है। मेहनत से उपजी फसल से माश झड़ रहे हैं। आंखों के सामने बर्बाद हो रहे हैं।वह जोखिम उठाकर चरणवार रूप से फसल काट रहे हैं।

एलओसी पार धमाके की आवाज आने पर 25 सेकेंड में सुरक्षित स्थानों की ओट ले लेते हैं क्योंकि इतने ही समय के बाद गोला गांव में आकर धमाके के साथ फटता है। गांव के निवासी और सेना के पूर्व कैप्टन गणेश सिंह के अनुसार पाकिस्तान की मुनावर और फार्वर्ड सहित तीन चौकियों से गांव पर गोले बरसते हैं।

पाकिस्तान चीन निर्मित 82 एमएम मोर्टार इस्तेमाल कर रहा है जो भारत के रुसी मोर्टार से 500 मीटर ज्यादा लंबी मार करते हैं।  ग्रामीण इसकी समझ रखते हैं इसलिए उस पार धमाका होने के 25 सेकेंड के भीतर खुद को बचाने में लग जाते हैं।

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