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दो दिन भूखे रहे, तीसरे दिन मिला बिस्कुट-पानी

Fri, 12 Sep 2014 01:40 AM IST
Updated Fri, 12 Sep 2014 01:40 AM IST
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story of a family stuck in kashmir flood

चारों तरफ पानी का सैलाब था। दो दिन से भूखे-प्यासे बच्चे बिलखते रहे, लेकिन जल प्रलय के सामने उनके माता-पिता बेबस थे। सैलाब में दो मंजिला मकान पानी में पूरा डूब गया। दूसरे चार मंजिला इमारत में पनाह तो ली, लेकिन वहां भी परिंदे के पंखों के फड़फड़ाने की आवाज भी सहमा देती थी।

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बेटी बेहोश थी, तो बेटा बदहवास। जीने की उम्मीद टूट ही चुकी थी, लेकिन ऐन मौके पर सेना के जवानों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया और बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर निकलकर उन्हें दूसरा जन्म मिल गया। श्रीनगर में बाढ़ के कहर की आपबीती सुनाते श्रीनगर से लौटा एक परिवार फफक पड़ा।
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पुराने बस अड्डे के निकट अपने मायके पहुंची डॉली, उसकी मां कृक्षित, बेटी गुडि़या और बेटा कामिल कठुआ पहुंचने के बावजूद दहशत में हैं।

'इसके बाद वहां अफरातफरी मच गई'

story of a family stuck in kashmir flood

डॉली ने बताया कि उसका ससुराल कुपवाड़ा में है, जबकि पति की ड्यूटी श्रीनगर के इंदिरा नगर में है। वह इंदिरा नगर में किराए के मकान में रह रहे थे। बीते शनिवार की रात को सेना ने झेलम के बांध के टूटने के आसार जताते हुए लाउड स्पीकर से घोषणा करवा दी थी, इसके बाद वहां अफरातफरी मच गई।

अगले दिन तड़के तीन बजे सड़कों तक पानी आना शुरू हो गया, जिसके बाद वे परिवार के सभी सदस्यों को लेकर बाहर निकल आए और मकान में पानी भरने की आशंका को देखते हुए सुरक्षित स्थान की ओर भागे। डॉली ने बताया कि सड़क डूब चुकी थी। उन्होंने एक नाव ली और अगले डेढ़ घंटे तक सुरक्षित स्थान को खोजते रहे।

पीने के पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हुई

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स्थानीय होटल व्यवसायी ने उन्हें चार मंजिला इमारत तक पहुंचाया। डॉली और उसकी मां ने बताया कि सुरक्षित स्थान पर पनाह तो मिल गई, लेकिन इसके बाद दुश्वारियां बढ़ गईं। पीने के पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हुई। बेटी बेहोश हो गई।

दो दिन उन्होंने बिना भोजन-पानी के गुजारे। तीसरे दिन उन्हें पानी के साथ बिस्कुट खाने को मिले। अपनी आंखों के सामने कई बच्चों और बड़ों को बहते देखने से उन्हें भी अपने परिवार के बचने की उम्मीद नहीं थी। ऐसे समय में सेना के जांबाज उनके लिए देवदूत बनकर पहुचे।


सेना के जवानों ने उनको बचाकर वहां से सुरक्षित निकाला। डॉली ने बताया कि अभी तक न तो उसका पति से संपर्क हुआ है और न ही कुपवाड़ा स्थित सुसराल वालों से।

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अपनों की खोज-खबर न मिलने से परिवार परेशान

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कश्मीर घाटी में आई बाढ़ में फंसे लोगों के परिवार अपनों की वापसी के लिए स्थानीय प्रशासन से लेकर जम्मू तक मारे-मारे फिर रहे हैं। अपनों की कोई खोज खबर न मिलने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही हैं। किशनपुर कंडी के रहने वाले बोधराज ने बताया कि उनका बेटा गुलशन सिंह दो सितंबर को बी-टेक काउंसलिंग के लिए श्रीनगर गया था।

बाढ़ आने के बाद नौ सितंबर को उसके साथ आखिरी दफा बात हुई। इसके बाद से उसका कोई अता पता नहीं है। इसी तरह से शहर के पटेलनगर में रहने वाले कैलाश सिंह ने बताया कि उनका बेटा नितिन सिंह भी काउंसिलिंग के लिए गया था, जो अभी तक नहीं लौटा है। उन्होंने बताया कि हर रोज वह बेटे की आने की आस लगाते हैं, लेकिन उसका लौटना तो दूर कोई खबर तक नहीं मिल पा रही है।

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