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अलगाववादियों की सुविधाएं बंद करने का फैसला सरकार के हाथ में: सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो, अमर उजाला/नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:30 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Demo Pic.
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जम्मू व कश्मीर में अलगाववादी समूहों को दिए जाने वाले सरकारी फंड को तत्काल बंद करने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।
पीठ ने कहा कि यह तय करना विधायिका का काम है, लिहाजा अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती। साथ ही पीठ ने कहा कि जनहित याचिका दायर कर इस तरह का मसला नहीं उठाया जा सकता। पीठ ने अदालत में हुर्रियत नेताओं के लिए अलगाववादी शब्द के इस्तेमाल पर भी एतराज जताया।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल इस याचिका को जनहित याचिका मानने से इनकार कर दिया।
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पीठ ने कहा कि यह तय करना विधायिका का काम है, लिहाजा अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती। साथ ही पीठ ने कहा कि जनहित याचिका दायर कर इस तरह का मसला नहीं उठाया जा सकता। पीठ ने अदालत में हुर्रियत नेताओं के लिए अलगाववादी शब्द के इस्तेमाल पर भी एतराज जताया।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल इस याचिका को जनहित याचिका मानने से इनकार कर दिया।
पीठ ने पूछा, 'आप किसे कह रहे अलगाववादी'?
कश्मीर के अलगाववादी नेता
- फोटो : File Photo
पीठ ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर किसे फंड दिया जाना है ओर किसे नहीं, यह तय करना विधायिका का काम है। इस तरह का मसला न्यायिक परीक्षण के दायरे से बाहर है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता वकील की ओर से हुर्रियत नेताओं को अलगाववादी कहने पर आपत्ति जताई। पीठ ने सवाल किया, कि आप अलगाववादी किसे कह रहे हैं। क्या सरकार ने उन्हें अलगाववादी घोषित कर रखा है।
पीठ ने कहा कि यह लोगों की धारणा से जुड़ा मसला है। किसी व्यक्ति के काम करने तरीका अलग हो सकता है, जो दूसरे लोगों को पसंद न हो और वे अलगाववादी कह सकते हैं, लेकिन अदालत में आप इस शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता वकील की ओर से हुर्रियत नेताओं को अलगाववादी कहने पर आपत्ति जताई। पीठ ने सवाल किया, कि आप अलगाववादी किसे कह रहे हैं। क्या सरकार ने उन्हें अलगाववादी घोषित कर रखा है।
पीठ ने कहा कि यह लोगों की धारणा से जुड़ा मसला है। किसी व्यक्ति के काम करने तरीका अलग हो सकता है, जो दूसरे लोगों को पसंद न हो और वे अलगाववादी कह सकते हैं, लेकिन अदालत में आप इस शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते।
अलगाववादियों पर सालाना अरबों खर्च करती है सरकार
कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
याचिका में गुहार की गई थी कि इस तरह के फंड को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देते हुए हमेशा के लिया बंद कर दिया जाना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों को फंड देने से रोकना होगा जो देश के हित के खिलाफ काम करते हैं।
याचिका में कहा गया था कि पिछले करीब पांच सालों में इन अलगाववादियों की सुरक्षा, उनके घूमने और रहने पर करीब 356 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्हें लग्जरी होटलों में रखने के मद में सरकार ने 21 करोड़ रुपये खर्च किए। उनकी यात्रा पर खर्च होने वाले ईंधन पर 26.43 करोड़ रुपये खर्च हुए और इन सभी यात्राओं में भारत विरोधी गतिविधियां हुईं।
ये खर्च आम लोगों से लिए वसूले जाने वाले टैक्स से हो रहा है और वह भी बिना संसद को जानकारी दिए। सीएजी ने भी इसे लेकर कोई ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं की कि आखिरकार इस फंड कहां इस्तेमाल होता है क्योंकि यह खर्च देश के खिलाफ विद्रोह करने के लिए हो रहा है।
याचिका में यह भी गुहार की गई है कि जो लोग इस तरह का गैरकानूनी फंड जारी कर रहे रहे हैं, सीबीआई को उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया था कि पिछले करीब पांच सालों में इन अलगाववादियों की सुरक्षा, उनके घूमने और रहने पर करीब 356 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्हें लग्जरी होटलों में रखने के मद में सरकार ने 21 करोड़ रुपये खर्च किए। उनकी यात्रा पर खर्च होने वाले ईंधन पर 26.43 करोड़ रुपये खर्च हुए और इन सभी यात्राओं में भारत विरोधी गतिविधियां हुईं।
ये खर्च आम लोगों से लिए वसूले जाने वाले टैक्स से हो रहा है और वह भी बिना संसद को जानकारी दिए। सीएजी ने भी इसे लेकर कोई ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं की कि आखिरकार इस फंड कहां इस्तेमाल होता है क्योंकि यह खर्च देश के खिलाफ विद्रोह करने के लिए हो रहा है।
याचिका में यह भी गुहार की गई है कि जो लोग इस तरह का गैरकानूनी फंड जारी कर रहे रहे हैं, सीबीआई को उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।