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आतंकवाद मिटाना सरकार की प्राथमिकता : उपराज्यपाल
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श्रीनगर के टैगोर हॉल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा। स्रोत राजभवन
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- मनोज सिन्हा ने पहाड़ी जनजातीय समुदाय की सभा को किया संबोधित
- आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने के लिए कहा, बोले-पत्थरबाजी अब इतिहास की बात
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को टैगोर हॉल में पहाड़ी जनजातीय समुदाय की सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवाद मिटाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। इसे खत्म किए बिना विकास नहीं हो सकता। उन्होंने पहाड़ी समुदाय के लोगों से आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने के लिए कहा।
टैगोर हॉल में अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि देश में आतंकवाद लगभग खत्म हो चुका है। देश के एक छोटे से हिस्से में नक्सलवाद है। उन नक्सलवादियों का कभी सपना था कि नेपाल तक रेड कॉरिडोर बना देंगे लेकिन उन्हें एक छोटे से हिस्से में समेट दिया गया है। आने वाले कुछ महीनों में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर आतंकवाद से लंबे समय से पीड़ित रहा है। यहां आतंकवाद समाप्त हो यह बहुत जरूरी है। इसके बिना न विकास हो सकता है न रोजगार मिल सकता है। सेना, सुरक्षाबल और पुलिस अपना काम कर रहे हैं लेकिन भारत का नागरिक होने के कारण हमारी भी यह जिम्मेदारी है कि हम कोई ऐसा काम न करें जिससे आतंकियों को लाभ हो।
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कई बार अनजाने में हम ऐसा काम कर जाते हैं। यह काफी मुश्किल हो जाता है। परिस्थितियां बदली हैं, पत्थरबाजी इतिहास की बात हो गई है। स्कूल, कॉलेज और व्यापार देश के बाकी हिस्सों की तरह चल रहे हैं। जितने भी नामी बड़े आतंकी संगठन हैं उनका कोई भी बड़ा सरगना जिंदा नहीं है। एक साल में केवल एक ही स्थानीय आतंकी भर्ती हुआ है। कई पैरामीटर्स है जिन पर काफी हद तक काबू पाया है।
दुर्भाग्य से हम ऐसा पड़ोसी पा गए हैं जिसके पेट में बराबर दर्द होता है। जब एक घर का बंटवारा होता है तो दोनों पक्ष अपने घर को सजाने और परिवार की तरक्की में लग जाते हैं। 1947 में बंटवारा हुआ। बंटवारे के बाद अपना घर संभालने की जगह उसने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। चार प्रत्यक्ष युद्ध वह लड़ चुका है और उन्हें हार चुका है।
यह बात उनकी समझ में आ गई कि प्रत्यक्ष युद्ध में भारत से वह नहीं जीत सकते इसलिए लोगों को गुमराह करके अप्रत्यक्ष युद्ध शुरू कर दिया। आतंकवाद के कारण कितनी महिलाएं बेवा हो गईं, कितनी माताओं के लाल चले गए। 40 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जानें इस आतंकवाद के कारण खोई हैैं। इसलिए आतंकवाद को खत्म करना शासन-प्रशासन का दायित्व है और आम लोगों की भी जिम्मेदारी है।
टीआरएफ का प्रोगैंडा बड़ा खतरा, इससे बचें
उपराज्यपाल ने कहा कि टीआरएफ का प्रोगैंडा बड़ा खतरा है। हमें इससे बचने की जरूरत है। आप लोग राष्ट्रवादी हैं देश आगे बढ़े इसके लिए कार्य करते हैं लेकिन आप लोगों को आतंक के खिलाफ आगे आना होगा। जब नैरेटिव इस तरह के बनाए जाते हैं, मैं नहीं कहता कि आप लोगों का आतंक से काेई वास्ता है लेकिन टीआरएफ के सोशल मीडिया हैंडल पर भी वही बात कही जा रही हो जो आप बयान देते हैं वह वाकई खतरनाक है। इस पर जरूर चिंतन करना चाहिए।
स्थायी विकास और समावेशी समृद्धि से उज्ज्वल होगा भविष्य
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि स्थायी विकास और समावेशी समृद्धि का विजन जनजातीय समुदाय के उज्ज्वल भविष्य को आकार देगा। पहाड़ी जनजातीय समुदाय को मुख्यधारा में लाना केंद्र की प्रतिबद्धता है और उनका सशक्तीकरण एक सुदृढ़ और समृद्ध केंद्र शासित प्रदेश का निर्माण करेगा। आदिवासी समुदायों का सशक्तीकरण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्ष संसद द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त समुदाय के विकास को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि उनकी समृद्धि हमारे समावेशी विकास लक्ष्य से मूल रूप से जुड़ी हुई है।
बिरसा मुंडा को भी दी श्रद्धांजलि
पहाड़ी समुदाय के प्रतिनिधियों की ओर से रखी गई मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पहाड़ी जातीय समूह संसद द्वारा पारित अधिनियम के अनुसार अपने अधिकारों काे प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने भगवान बिरसा मुंडा को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, पहाड़ी कल्याण समिति के अध्यक्ष जफर इकबाल मन्हास, पहाड़ी संस्कृति एवं कल्याण मंच के अध्यक्ष राजा एजाज अली आदि उपस्थित थे।
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- आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने के लिए कहा, बोले-पत्थरबाजी अब इतिहास की बात
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को टैगोर हॉल में पहाड़ी जनजातीय समुदाय की सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवाद मिटाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। इसे खत्म किए बिना विकास नहीं हो सकता। उन्होंने पहाड़ी समुदाय के लोगों से आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने के लिए कहा।
टैगोर हॉल में अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि देश में आतंकवाद लगभग खत्म हो चुका है। देश के एक छोटे से हिस्से में नक्सलवाद है। उन नक्सलवादियों का कभी सपना था कि नेपाल तक रेड कॉरिडोर बना देंगे लेकिन उन्हें एक छोटे से हिस्से में समेट दिया गया है। आने वाले कुछ महीनों में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर आतंकवाद से लंबे समय से पीड़ित रहा है। यहां आतंकवाद समाप्त हो यह बहुत जरूरी है। इसके बिना न विकास हो सकता है न रोजगार मिल सकता है। सेना, सुरक्षाबल और पुलिस अपना काम कर रहे हैं लेकिन भारत का नागरिक होने के कारण हमारी भी यह जिम्मेदारी है कि हम कोई ऐसा काम न करें जिससे आतंकियों को लाभ हो।
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कई बार अनजाने में हम ऐसा काम कर जाते हैं। यह काफी मुश्किल हो जाता है। परिस्थितियां बदली हैं, पत्थरबाजी इतिहास की बात हो गई है। स्कूल, कॉलेज और व्यापार देश के बाकी हिस्सों की तरह चल रहे हैं। जितने भी नामी बड़े आतंकी संगठन हैं उनका कोई भी बड़ा सरगना जिंदा नहीं है। एक साल में केवल एक ही स्थानीय आतंकी भर्ती हुआ है। कई पैरामीटर्स है जिन पर काफी हद तक काबू पाया है।
दुर्भाग्य से हम ऐसा पड़ोसी पा गए हैं जिसके पेट में बराबर दर्द होता है। जब एक घर का बंटवारा होता है तो दोनों पक्ष अपने घर को सजाने और परिवार की तरक्की में लग जाते हैं। 1947 में बंटवारा हुआ। बंटवारे के बाद अपना घर संभालने की जगह उसने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। चार प्रत्यक्ष युद्ध वह लड़ चुका है और उन्हें हार चुका है।
यह बात उनकी समझ में आ गई कि प्रत्यक्ष युद्ध में भारत से वह नहीं जीत सकते इसलिए लोगों को गुमराह करके अप्रत्यक्ष युद्ध शुरू कर दिया। आतंकवाद के कारण कितनी महिलाएं बेवा हो गईं, कितनी माताओं के लाल चले गए। 40 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जानें इस आतंकवाद के कारण खोई हैैं। इसलिए आतंकवाद को खत्म करना शासन-प्रशासन का दायित्व है और आम लोगों की भी जिम्मेदारी है।
टीआरएफ का प्रोगैंडा बड़ा खतरा, इससे बचें
उपराज्यपाल ने कहा कि टीआरएफ का प्रोगैंडा बड़ा खतरा है। हमें इससे बचने की जरूरत है। आप लोग राष्ट्रवादी हैं देश आगे बढ़े इसके लिए कार्य करते हैं लेकिन आप लोगों को आतंक के खिलाफ आगे आना होगा। जब नैरेटिव इस तरह के बनाए जाते हैं, मैं नहीं कहता कि आप लोगों का आतंक से काेई वास्ता है लेकिन टीआरएफ के सोशल मीडिया हैंडल पर भी वही बात कही जा रही हो जो आप बयान देते हैं वह वाकई खतरनाक है। इस पर जरूर चिंतन करना चाहिए।
स्थायी विकास और समावेशी समृद्धि से उज्ज्वल होगा भविष्य
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि स्थायी विकास और समावेशी समृद्धि का विजन जनजातीय समुदाय के उज्ज्वल भविष्य को आकार देगा। पहाड़ी जनजातीय समुदाय को मुख्यधारा में लाना केंद्र की प्रतिबद्धता है और उनका सशक्तीकरण एक सुदृढ़ और समृद्ध केंद्र शासित प्रदेश का निर्माण करेगा। आदिवासी समुदायों का सशक्तीकरण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्ष संसद द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त समुदाय के विकास को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि उनकी समृद्धि हमारे समावेशी विकास लक्ष्य से मूल रूप से जुड़ी हुई है।
बिरसा मुंडा को भी दी श्रद्धांजलि
पहाड़ी समुदाय के प्रतिनिधियों की ओर से रखी गई मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पहाड़ी जातीय समूह संसद द्वारा पारित अधिनियम के अनुसार अपने अधिकारों काे प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने भगवान बिरसा मुंडा को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, पहाड़ी कल्याण समिति के अध्यक्ष जफर इकबाल मन्हास, पहाड़ी संस्कृति एवं कल्याण मंच के अध्यक्ष राजा एजाज अली आदि उपस्थित थे।