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श्रीनगर: केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल को GST के तहत लाने को तैयार- हरदीप पुरी

Tue, 15 Nov 2022 11:11 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 15 Nov 2022 11:11 AM IST
सार

मंत्री पुरी ने कहा, हमारे पड़ोस में कुछ ऐसे देश हैं जिनके पास ईंधन की कमी है और कीमतें अत्यधिक हैं, लेकिन हमारे पास देश के दूरदराज के इलाकों में भी कमी नहीं थी।

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Srinagar: Minister of Petroleum Hardeep Puri said Central govt ready to bring petrol and diesel under GST
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के अंतर्गत लाने के लिए तैयार है। हालांकि इस बात की संभावना कम है कि राज्य इस तरह के कदम से सहमत होंगे। पुरी ने कहा, जीएसटी के तहत पेट्रोल और डीजल को लाने के लिए राज्यों को सहमत होना होगा। यदि राज्य कदम उठाते हैं, तो हम तैयार हैं। यह मेरा मानना है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर वित्त मंत्री को तय करना है कि इसे कैसे लागू किया जाए। पुरी सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। वह दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं।

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केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि राज्यों के सहमत होने की संभावना काफी कम है क्योंकि शराब और ऊर्जा उनके लिए राजस्व पैदा करने वाली वस्तुएं हैं। जिसे राजस्व मिल रहा है, वह इसे क्यों छोड़ेगा। यह केवल केंद्र सरकार है जो मुद्रास्फीति और अन्य चीजों के बारे में चिंतित है। 
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उन्होंने कहा, केरल उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया था कि इस मुद्दे को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की लखनऊ में हुई पिछली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाए, लेकिन उस राज्य के वित्त मंत्री सहमत नहीं थे। जहां तक जीएसटी का सवाल है, आपकी इच्छाएं और मेरी इच्छाएं अलग हैं, हम एक सहयोगी संघीय प्रणाली में हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या लोग ईंधन की कीमतों में कुछ राहत की उम्मीद कर सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले एक साल में इन कीमतों में सबसे कम वृद्धि देखी है।
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उन्होंने कहा, मैं आपके सवाल से हैरान हूं। लोग हल्के-फुल्के अंदाज में मुझसे पूछ रहे हैं कि कीमतें दोबारा कब बढ़ेंगी। उत्तरी अमेरिका में एक साल में ईंधन की कीमतें 43 प्रतिशत बढ़ीं, लेकिन भारत में यह केवल दो प्रतिशत बढ़ीं। अगर दुनिया में कहीं उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है तो वो भारत में है। यह मेरा नहीं बल्कि दुनिया की मशहूर रेटिंग एजेंसी मॉर्गन स्टेनली का कहना है। 

मंत्री पुरी ने कहा, हमारे पड़ोस में कुछ ऐसे देश हैं जिनके पास ईंधन की कमी है और कीमतें अत्यधिक हैं, लेकिन हमारे पास देश के दूरदराज के इलाकों में भी कमी नहीं थी। केंद्र और राज्यों के स्तर पर बहुत मजबूत संवाद है। भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कहा, मार्च 2020 में कोविड के दौरान एक तेल बैरल की कीमत घटकर 19.56 डॉलर हो गई थी, जो अब 96 डॉलर है। मैं काल्पनिक सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि केंद्र सरकार के प्रयासों का जवाब देता हूं। 

कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र ले जाना नेहरू की भूल

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने का फैसला एक बड़ी भूल थी। मेरी जानकारी यह है कि महाराजा हरि सिंह विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके खुश थे। लेकिन दिल्ली में राजनीतिक नेतृत्व कह रहा था कि यह विलय अधिक व्यापक हो और इसलिए वे एक जनमत संग्रह चाहते थे। वे इसे एक बहुपक्षीय मंच पर ले जाना चाहते थे। इससे बड़ी मूर्खता आपके पास नहीं हो सकती। मैं मूर्खता शब्द का प्रयोग बहुत हल्के ढंग से कर रहा हूं।

रिजिजू के बयान से जताई सहमति 
जब केंद्रीय मत्री से पूछा गया कि क्या वह अपने कैबिनेट सहयोगी किरेन रिजिजू के नेहरू के कश्मीर से निपटने के तरीके पर विचारों से सहमत हैं, जिसे कानून मंत्री ने एक लेख में व्यक्त किया था। इस पर पुरी ने कहा, क्या यह निर्णय की त्रुटि थी?  आप कह सकते हैं कि उस आदमी ने गलती की लेकिन आप उसे सही नहीं ठहरा सकते। ऐतिहासिक तथ्य आपके चेहरे पर घूर रहे हैं कि संदर्भ देना और जनमत संग्रह के लिए मांग करना एक मूर्खता नहीं है, मुझे लगता है कि यह एक बड़ी भूल है। इसलिए मैं अपने प्रिय मित्र और सहयोगी किरेन रिजिजू से पूरी तरह सहमत हूं।


मंत्री पुरी ने कहा कि नेहरू की गलती की वजह से ही पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में परेशानी पैदा कर पाया। उन्होंने कहा, क्योंकि आपने वह गलती की, अन्य लोगों ने इसका फायदा उठाया। एक देश आतंक का उपयोग राज्य की नीति के एक साधन के रूप में करता रहा है। मैं 20 साल पहले कह चुका हूं। एक विदेशी चैनल से बातचीत में में मैंने कहा कि यह सीमा पार से पैदा की गई समस्या है, लेकिन वे इस समस्या को पैदा कर सकते हैं, क्योंकि हमारी तरफ  से किसी ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी है। मंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज जब वह कश्मीर में हैं, हम विकास की बात कर रहे हैं। कुछ साल पहले हम पेशेवर पत्थरबाजों के एक पूरे कैडर को झेल रहे थे। 

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