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स्थानीय उत्पाद खरीदें और हमारे कारीगरों को सशक्त बनाएं : उपराज्यपाल
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एसकेआईसीसी में कारीगराें की हस्तकला को देखते उपराज्यपाल। स्रोत राजभवन
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- पश्मीना कारीगर पुरस्कार समारोह में एलजी मनोज सिन्हा ने शिल्पकारों को किया सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को पश्मीना उद्यमी निर्माता एवं कारीगर फाउंडेशन की ओर से आयोजित पश्मीना कारीगर पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पाद खरीदें और हमारे महान कारीगरों को सशक्त बनाएं।
उन्होंने एसकेआईसीसी में शिल्पकारों को सम्मानित करने के बाद कहा कि देश के प्रत्येक घर को उस्ताद कारीगरों की ओर से निर्मित रचनात्मक उत्पाद अवश्य खरीदना चाहिए। उपराज्यपाल ने कहा कि मुझे विश्वास है कि देश का बढ़ता मध्यम वर्ग जो 2030 तक आधी से अधिक आबादी का गठन कर सकता है। जम्मू-कश्मीर के हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए एक मजबूत घरेलू बाजार तैयार करेगा।
जम्मू-कश्मीर समृद्ध रचनात्मक परंपरा का भंडार है जो इसके अनूठे और सरल हस्तनिर्मित उत्पादों में प्रकट होता है। 2020 से अब तक की विभिन्न पहलों ने हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और इसे वैश्विक शिल्प बाजार में एक अद्वितीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में नई योजनाओं और नीतिगत हस्तक्षेपों के साथ-साथ मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास ने युवा और कुशल कारीगरों को मदद दी है और यहां की अनूठी सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को पुनर्जीवित किया है।
उपराज्यपाल ने संबंधित विभागों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि कारीगरों को नए जीएसटी सुधारों का सीधा लाभ मिले। उन्होंने भारत और विदेशों में प्रमुख हवाई अड्डों, शॉपिंग मॉल और ई-कॉमर्स साइटों पर जम्मू कश्मीर की खूबसूरत कला की दृश्यता बढ़ाने और उत्पाद के पीछे के कुशल हाथों को पहचान प्रदान करने पर जोर दिया।
प्रसिद्ध शहरों और गांवों को वैश्विक शिल्प मानचित्र पर भी बढ़ावा दें
उपराज्यपाल ने आगे कहा कि हमें अपने कारीगरों के लिए प्रसिद्ध शहरों और गांवों को वैश्विक शिल्प मानचित्र पर भी बढ़ावा देना चाहिए ताकि दशकों से इन कलाओं का अभ्यास करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को उचित सम्मान और मान्यता मिल सके जिसके वे हकदार हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को पश्मीना उद्यमी निर्माता एवं कारीगर फाउंडेशन की ओर से आयोजित पश्मीना कारीगर पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पाद खरीदें और हमारे महान कारीगरों को सशक्त बनाएं।
उन्होंने एसकेआईसीसी में शिल्पकारों को सम्मानित करने के बाद कहा कि देश के प्रत्येक घर को उस्ताद कारीगरों की ओर से निर्मित रचनात्मक उत्पाद अवश्य खरीदना चाहिए। उपराज्यपाल ने कहा कि मुझे विश्वास है कि देश का बढ़ता मध्यम वर्ग जो 2030 तक आधी से अधिक आबादी का गठन कर सकता है। जम्मू-कश्मीर के हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए एक मजबूत घरेलू बाजार तैयार करेगा।
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जम्मू-कश्मीर समृद्ध रचनात्मक परंपरा का भंडार है जो इसके अनूठे और सरल हस्तनिर्मित उत्पादों में प्रकट होता है। 2020 से अब तक की विभिन्न पहलों ने हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और इसे वैश्विक शिल्प बाजार में एक अद्वितीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में नई योजनाओं और नीतिगत हस्तक्षेपों के साथ-साथ मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास ने युवा और कुशल कारीगरों को मदद दी है और यहां की अनूठी सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को पुनर्जीवित किया है।
उपराज्यपाल ने संबंधित विभागों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि कारीगरों को नए जीएसटी सुधारों का सीधा लाभ मिले। उन्होंने भारत और विदेशों में प्रमुख हवाई अड्डों, शॉपिंग मॉल और ई-कॉमर्स साइटों पर जम्मू कश्मीर की खूबसूरत कला की दृश्यता बढ़ाने और उत्पाद के पीछे के कुशल हाथों को पहचान प्रदान करने पर जोर दिया।
प्रसिद्ध शहरों और गांवों को वैश्विक शिल्प मानचित्र पर भी बढ़ावा दें
उपराज्यपाल ने आगे कहा कि हमें अपने कारीगरों के लिए प्रसिद्ध शहरों और गांवों को वैश्विक शिल्प मानचित्र पर भी बढ़ावा देना चाहिए ताकि दशकों से इन कलाओं का अभ्यास करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को उचित सम्मान और मान्यता मिल सके जिसके वे हकदार हैं।