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Jammu News: हाई कोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों को जमानत मामलों पर जल्द फैसला करने को कहा
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों की सभी सेशन और न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट से कहा है कि अपने यहां लंबित जमानत और अग्रिम जमानत के आवेदनों पर जल्द फैसला करें। बेहतर होगा कि फाइल करने की तारीख से दो महीने के अंदर निर्णय लें।
यह आदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (अस्थायी) ने 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक अपील संख्या 4004/2025, अन्ना वामन भालक्राओ बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए फैसले के अनुसरण में जारी किया है।
आदेश मेंं कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख प्रदेश की सभी सेशन और न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट यह सुनिश्चित करें कि उनके समक्ष लंबित जमानत और अग्रिम जमानत के आवेदनों पर जल्द फैसला किया जाए। बेहतर होगा कि केस फाइल करने की तारीख से दो महीने के अंदर, सिवाय उन मामलों के जहां देरी का कारण पक्षकार खुद हों।
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे मामलों में अनिश्चितकालीन स्थगन से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे लंबित मामले सीधे स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। ब्यूरो
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यह आदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (अस्थायी) ने 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक अपील संख्या 4004/2025, अन्ना वामन भालक्राओ बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए फैसले के अनुसरण में जारी किया है।
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आदेश मेंं कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख प्रदेश की सभी सेशन और न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट यह सुनिश्चित करें कि उनके समक्ष लंबित जमानत और अग्रिम जमानत के आवेदनों पर जल्द फैसला किया जाए। बेहतर होगा कि केस फाइल करने की तारीख से दो महीने के अंदर, सिवाय उन मामलों के जहां देरी का कारण पक्षकार खुद हों।
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे मामलों में अनिश्चितकालीन स्थगन से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे लंबित मामले सीधे स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। ब्यूरो