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Jammu News: पुलिस भर्ती में एसपीओ को मिल सकती है पूर्व सैनिकों जैसी छूट
Sun, 14 Sep 2025 01:52 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:52 AM IST
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जम्मू। विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के लिए पुलिस भर्ती में बड़ा रास्ता खुल सकता है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की श्रीनगर पीठ ने आदेश दिया है कि विभाग एसपीओ को भी शारीरिक परीक्षा में वही छूट देने पर विचार करे, जो फिलहाल पूर्व सैनिकों को मिलती है।
मामला अशरार बशीर डार समेत कई एसपीओ की याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से पुलिस विभाग में बिना किसी शिकायत के सेवा दे रहे हैं और लिखित परीक्षा में भी सफल हुए। शारीरिक परीक्षा (पीईटी) में दौड़ के तय समय से कुछ सेकंड पीछे रहने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह मानक कठोर है और पूर्व सैनिकों की तरह एसपीओ को भी राहत मिलनी चाहिए। उनकी ओर से दलील दी गई कि विभाग ने उम्र सीमा में तो ढील दी, लेकिन शारीरिक परीक्षा में कोई राहत नहीं दी, जबकि उनकी सेवा और अनुभव को देखते हुए यह अपेक्षित था।
कैट के न्यायिक सदस्य एमएस लतीफ ने सुनवाई के दौरान माना कि चयन मानक तय करना सरकार का अधिकार है, लेकिन यह मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए। जब पूर्व सैनिकों को शारीरिक परीक्षा में अतिरिक्त समय और कम पुश-अप्स की छूट मिल सकती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे एसपीओ की मांग को भी मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
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कैट ने गृह विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को चार हफ्तों के भीतर एसपीओ की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि चूंकि याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं और केवल मामूली अंतर से शारीरिक परीक्षा में पीछे रह गए, इसलिए उनकी अर्जी पर संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण तरीके से निर्णय लिया जाए।
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मामला अशरार बशीर डार समेत कई एसपीओ की याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से पुलिस विभाग में बिना किसी शिकायत के सेवा दे रहे हैं और लिखित परीक्षा में भी सफल हुए। शारीरिक परीक्षा (पीईटी) में दौड़ के तय समय से कुछ सेकंड पीछे रहने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह मानक कठोर है और पूर्व सैनिकों की तरह एसपीओ को भी राहत मिलनी चाहिए। उनकी ओर से दलील दी गई कि विभाग ने उम्र सीमा में तो ढील दी, लेकिन शारीरिक परीक्षा में कोई राहत नहीं दी, जबकि उनकी सेवा और अनुभव को देखते हुए यह अपेक्षित था।
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कैट के न्यायिक सदस्य एमएस लतीफ ने सुनवाई के दौरान माना कि चयन मानक तय करना सरकार का अधिकार है, लेकिन यह मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए। जब पूर्व सैनिकों को शारीरिक परीक्षा में अतिरिक्त समय और कम पुश-अप्स की छूट मिल सकती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे एसपीओ की मांग को भी मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
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कैट ने गृह विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को चार हफ्तों के भीतर एसपीओ की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि चूंकि याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं और केवल मामूली अंतर से शारीरिक परीक्षा में पीछे रह गए, इसलिए उनकी अर्जी पर संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण तरीके से निर्णय लिया जाए।