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कुछ ऐसे शुरु हुई थी अरनियां के गांव की मनहूस सुबह

Fri, 28 Nov 2014 12:59 PM IST
Updated Fri, 28 Nov 2014 12:59 PM IST
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special story on arnia army encounter

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से... चारों ओर सुरक्षा बलों के जवान ही जवान। रुक रुक कर बीच में गोलियां चलने की आवाज। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और जेएंडके पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप के कमांडो मोर्चे पर जाने के लिए तैयारी में। कुछ ऐसा मंजर जम्मू से लगभग 35 किलोमीटर दूर गांव कठार का रहा, जहां सीमा पार से आए आतंकी बंकर में शरण लेकर लगातार गोलाबारी करते रहे।

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दिनभर की मशक्कत के बाद जब आतंकी बंकरों से नहीं निकले तो शाम को सेना ने दो ‘आक्रोश टैंक’ गांव में पहुंचाएं, जिन्हें देर रात ‘मिशन कठार’ में उपयोग किया जाएगा। सेना ने पूरा गांव खाली करवा दिया। गांव की पंचायत घर में सेना ने अस्थाई शिविर लगा लिया। बड़े-बड़े जेनरेटर लगाए गए हैं।
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सुबह सबसे पहले मौके के पास से स्कूली बच्चे गुजरे। उन्हें नहीं पता था कि सेना की वर्दी में खड़े आठ-दस लोग उनके देश के जवान हैं या फिर दुश्मन। हालांकि आतंकियों ने इन बच्चों को कुछ नहीं कहा। पिंडी गांव के यह बच्चे रोजाना बंकर के पास से गांव आले स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने जाते हैं।
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यदि आतंकी उस गांव के स्कूल में पहुंच जाते तो?

special story on arnia army encounter

यदि आतंकी उस गांव के स्कूल में पहुंच जाते तो कहर बरपा सकते थे। गांव कठार के ही बिट्टू बावा और सौदागर अपने खेतों में सुबह के समय पहुंचे थे। आतंकियों ने उनसे पराली जलाने के लिए माचिस मांगी। उन्होंने माचिस न होने की बात कही।

इसके बाद आतंकियों ने उन्हें भी कुछ नहीं कहा। लेकिन एकाएक गोलियां चलने की आवाज सुन दोनों किसी तरह खेतों से भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। जबकि उनके ही गांव का विक्की आतंकियों की गोली का शिकार हो गया।

आतंकियों ने जब गोलियां बरसाईं तो गांव का युवक राकेश शर्मा अपने घर की छत पर खड़ा था। बकौल राकेश उसने देखा कि एक बाइक सवार उस बंकर की ओर बढ़ा जा रहा था, जहां आतंकियों की गोलियों के शिकार हुए लोगों के शव पड़े थे। मोर्चा संभाले सेना के जवानों ने उसे आवाजें लगाकर आगे न बढ़ने को कहा, लेकिन इसके बावजूद वह बढ़ता हुआ बंकर के करीब पहुंच गया।

जब उसे गलती का अहसास हुआ तो उसने बाइक मोड़ लौटने का प्रयास किया। इसी दौरान आतंकियों ने उसे गोलियों से भून दिया। वह दृश्य याद कर राकेश सहम जाता है। दोपहर बाद महिलाएं अपने बच्चों के साथ गांव से बाहर निकल अपने रिश्तेदारों के पास जाती देखीं गईं।

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