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जम्मू-कश्मीर: आतंकी फंडिंग में हिजबुल के तीन ओजीडब्ल्यू को उम्रकैद, एनआईए की विशेष कोर्ट ने सुनाई सजा
Tue, 25 Apr 2023 02:44 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Tue, 25 Apr 2023 02:44 AM IST
सार
एनआईए अदालत जम्मू के विशेष न्यायाधीश अश्विनी शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कहा कि आरोपी इस काबिल नहीं हैं कि उनकी सजा को कम किया जा सके। कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
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त्रिपुरा की अदालत ने सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार तीन ओजी वर्करों को एनआईए की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। वर्ष 2004 में बाड़ी ब्राह्मणा में हिजबुल मुजाहिदीन के माजिद अली शेख, शाह नवाज और माजिद अमीन को सेना और पुलिस ने मिलकर गिरफ्तार किया था।
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इनके पास से 9.38 लाख रुपये बरामद किए गए थे। दिल्ली से जम्मू की तरफ आ रही एक ओमिनी वैन (जेके02जे 1505) से इन लोगों को पकड़ा गया था। इन लोगों ने यह पैसा डोडा के रहने वाले जावेद अहमद वानी से लिया था, जिसे हिजबुल के कमांडर मसूद अहमद को दिया जाना था।
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सोमवार को एनआईए अदालत जम्मू के विशेष न्यायाधीश अश्विनी शर्मा ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। इसके बाद कहा कि आरोपी इस काबिल नहीं हैं कि उनकी सजा को कम किया जा सके। कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
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वर्तमान मामले में अभियुक्त आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराध करने में शामिल हैं। आतंकवादी कृत्य सरकारों को अस्थिर, नागरिक समाज को कमजोर, शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने के अलावा आर्थिक और सामाजिक विकास को खतरे में डाल सकता है।
विशेष रूप से कुछ समूहों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। यह आजीविका को बाधित करता है, हिंसा और भय को बढ़ाता है, अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के उत्पादन को प्रभावित करता है। बुनियादी ढांचे को नष्ट करता है।
इसके परिणामस्वरूप रक्तपात होता है। कम सजा देने के लिए अनावश्यक सहानुभूति न्यायपूर्ण प्रणाली को और अधिक नुकसान पहुंचाएगी। समाज इस तरह के गंभीर कार्यों को लंबे समय तक सहन नहीं करेगा।
लिहाजा इन लोगों को जमानत नहीं दी जा सकती और इनको उम्रकैद की सजा सुनाई जा रही है। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।