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किसी ने बनाया ढोकला कोई लिख रहा कविताएं
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जम्मू। 21 दिन के लॉकडाउन की अवधि पूरी होने का इंतजार हो रहा है। लेकिन घरों में रहकर हर नए दिन के साथ लोग अपनी रुचि-रुझान के हिसाब से कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हैं। रविवार को किसी ने प्रसिद्ध गुजराती व्यंजन ढोकला बनाया तो किसी ने कविताएं लिखीं।
जस्वां प्रयाल मढ़ ब्लॉक की रहने वाली नेहा जम्वाल लॉकडाउन के दौरान नई-नई डिश बनाना सीख रही हैं। रविवार को नेहा ने अपने भाई अधीक्ष के साथ मिलकर गुजराती व्यंजन ढोकला बनाया। दोनों ने ढोकला के साथ सेल्फी लेकर अमर उजाला को भेजी।
सौरव मेहरा कराटे खिलाड़ी और कोच हैं। सौरव ने बताया कि वह इन दिनों कराटे के अभ्यास को ज्यादा समय दे रहे हैं। सौरव ने कहा कि वह सरकार को स्वयंसेवी के तौर पर किसी भी आपात स्थिति में सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। सभी लॉकडाउन में सहयोग करें।
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शालू शर्मा लिखती हैं, लेखन का शौक रखने वालों के लिए अब पर्याप्त समय है। वह कविताएं लिख रही हैं। शहर के एक स्कूल में शिक्षक शालू की कविता कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए पर्यावरण, मानवता से जुड़ी चिंताओं को व्यक्त करती है।
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जस्वां प्रयाल मढ़ ब्लॉक की रहने वाली नेहा जम्वाल लॉकडाउन के दौरान नई-नई डिश बनाना सीख रही हैं। रविवार को नेहा ने अपने भाई अधीक्ष के साथ मिलकर गुजराती व्यंजन ढोकला बनाया। दोनों ने ढोकला के साथ सेल्फी लेकर अमर उजाला को भेजी।
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सौरव मेहरा कराटे खिलाड़ी और कोच हैं। सौरव ने बताया कि वह इन दिनों कराटे के अभ्यास को ज्यादा समय दे रहे हैं। सौरव ने कहा कि वह सरकार को स्वयंसेवी के तौर पर किसी भी आपात स्थिति में सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। सभी लॉकडाउन में सहयोग करें।
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शालू शर्मा लिखती हैं, लेखन का शौक रखने वालों के लिए अब पर्याप्त समय है। वह कविताएं लिख रही हैं। शहर के एक स्कूल में शिक्षक शालू की कविता कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए पर्यावरण, मानवता से जुड़ी चिंताओं को व्यक्त करती है।