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Jammu News: लद्दाख में इस समय बर्फबारी चौंका रही, बर्फीले तूफान की आशंका
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड की ही तरह लद्दाख के मौसम में भी तब्दीली देखने को मिल रही है। केंद्रशासित क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में अत्यधिक वर्षा के साथ ही बाढ़ की आशंका बनी हुई है। वहीं, आश्चर्यजनक रूप से अगस्त माह में शुरू हुई बर्फबारी का सिलसिला सितंबर में भी जारी है। इस बीच वैज्ञानिक भविष्य में बर्फीले तूफान की भी आशंका जता रहे हैं।
लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र में वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक करीब दस वर्ष से कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में यहां कैंप कर रहे ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. मनीष मेहता बताते हैं कि दो दिन से रंगदुम क्षेत्र में लगातार बर्फबारी हो रही है। डॉ. मेहता के अनुसार बीते दस साल में उन्होंने इस क्षेत्र में कभी इतनी बारिश और बर्फबारी नहीं देखी। केवल दो ही दिन 24 और 25 अगस्त को पारकचिक में 100 मिमी से अधिक रेनफॉल और आधा फीट से अधिक स्नोफॉल दर्ज हुआ।
उनके अनुसार मानसूनी हवा हिमालय को चीरकर तिब्बत की तरफ जा रही हैं। लद्दाख में मानसूनी हवाओं और अधिक नमी की वह से इस बार ग्लेेशियर क्षेत्र में समय से पूर्व अच्छी बर्फबारी हो रही है, जो ग्लेशियरों के लिए तो ठीक है, लेकिन मानव के लिए खतरनाक है। हिमालय नाजुक क्षेत्र है, वह इसे झेल नहीं पाएगा। फ्लैश फ्लड और लैंड स्लाइड बढ़ने की आशंका है। बर्फीले तूफान की भी आशंका बनी हुई है।
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वापसी नहीं कर पा रहे वैज्ञानिक
लद्दाख के रंगदुम में लगातार बारिश से यहां कैंप कर रहे वैज्ञानिकों की टीम वापसी नहीं कर पा रही। डॉ. मनीष मेहता के अनुसार टीम और ग्लेशियर दोनों सुरक्षित हैं।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड की ही तरह लद्दाख के मौसम में भी तब्दीली देखने को मिल रही है। केंद्रशासित क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में अत्यधिक वर्षा के साथ ही बाढ़ की आशंका बनी हुई है। वहीं, आश्चर्यजनक रूप से अगस्त माह में शुरू हुई बर्फबारी का सिलसिला सितंबर में भी जारी है। इस बीच वैज्ञानिक भविष्य में बर्फीले तूफान की भी आशंका जता रहे हैं।
लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र में वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक करीब दस वर्ष से कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में यहां कैंप कर रहे ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. मनीष मेहता बताते हैं कि दो दिन से रंगदुम क्षेत्र में लगातार बर्फबारी हो रही है। डॉ. मेहता के अनुसार बीते दस साल में उन्होंने इस क्षेत्र में कभी इतनी बारिश और बर्फबारी नहीं देखी। केवल दो ही दिन 24 और 25 अगस्त को पारकचिक में 100 मिमी से अधिक रेनफॉल और आधा फीट से अधिक स्नोफॉल दर्ज हुआ।
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उनके अनुसार मानसूनी हवा हिमालय को चीरकर तिब्बत की तरफ जा रही हैं। लद्दाख में मानसूनी हवाओं और अधिक नमी की वह से इस बार ग्लेेशियर क्षेत्र में समय से पूर्व अच्छी बर्फबारी हो रही है, जो ग्लेशियरों के लिए तो ठीक है, लेकिन मानव के लिए खतरनाक है। हिमालय नाजुक क्षेत्र है, वह इसे झेल नहीं पाएगा। फ्लैश फ्लड और लैंड स्लाइड बढ़ने की आशंका है। बर्फीले तूफान की भी आशंका बनी हुई है।
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वापसी नहीं कर पा रहे वैज्ञानिक
लद्दाख के रंगदुम में लगातार बारिश से यहां कैंप कर रहे वैज्ञानिकों की टीम वापसी नहीं कर पा रही। डॉ. मनीष मेहता के अनुसार टीम और ग्लेशियर दोनों सुरक्षित हैं।