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Jammu News: कलश यात्रा में श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाकर भक्तिमय बनाया माहौल
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गांव रेहाल में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ तथा कथा की हुई शुरूआत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिश्नाह। गांव रेहाल में रविवार से 60वें श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ तथा कथा की शुरूआत हुई। यह धार्मिक कार्यक्रम 4 जून तक चलेगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने राम नारायण दास शास्त्री की अगुवाई में कलश यात्रा निकाली। इसमें शामिल श्रद्धालु प्रभु भक्ति के जयघोष लगाते बढ़ रहे थे, जिससे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया। प्रभु की महिमा और भक्ति के अमृत वचनों को सुनने के लिए क्षेत्र के सभी वर्गों के लोगों ने कथा में भाग लिया।
कथा का प्रारंभ खेमराज शास्त्री ने प्रभु वंदना से किया। तदोपरांत शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान वासुदेव के अमृत वचनों और लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि मन के अधीन होकर किए कर्मों के कारण मनुष्य जन्म-मरण के चक्कर में बंधा हुआ है। सुख-दुख को भोगता हुआ अनेक कष्ट सहता मनुष्य परम शांति और सुख की तलाश में भटक रहा है, लेकिन सच्चा सुख और शांति केवल प्रभु भक्ति से ही मिल सकती है। प्रभु की सच्ची भक्ति से ही जन्म-मरण के बंधन को काटकर परम मुक्ति को हासिल किया जा सकता है। मंदिर के महंत राम नारायण दास शास्त्री ने बताया कि यज्ञ व कथा की शुरुआत श्री श्री 1008 दुर्गा दास महाराज ने की थी। तब से इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होता आ रहा है। क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा भाईचारे को बढ़ाते हुए सभी धर्म प्रेमियों के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। उन्होंने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से कथा में भाग लेने की प्रार्थना की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिश्नाह। गांव रेहाल में रविवार से 60वें श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ तथा कथा की शुरूआत हुई। यह धार्मिक कार्यक्रम 4 जून तक चलेगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने राम नारायण दास शास्त्री की अगुवाई में कलश यात्रा निकाली। इसमें शामिल श्रद्धालु प्रभु भक्ति के जयघोष लगाते बढ़ रहे थे, जिससे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया। प्रभु की महिमा और भक्ति के अमृत वचनों को सुनने के लिए क्षेत्र के सभी वर्गों के लोगों ने कथा में भाग लिया।
कथा का प्रारंभ खेमराज शास्त्री ने प्रभु वंदना से किया। तदोपरांत शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान वासुदेव के अमृत वचनों और लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि मन के अधीन होकर किए कर्मों के कारण मनुष्य जन्म-मरण के चक्कर में बंधा हुआ है। सुख-दुख को भोगता हुआ अनेक कष्ट सहता मनुष्य परम शांति और सुख की तलाश में भटक रहा है, लेकिन सच्चा सुख और शांति केवल प्रभु भक्ति से ही मिल सकती है। प्रभु की सच्ची भक्ति से ही जन्म-मरण के बंधन को काटकर परम मुक्ति को हासिल किया जा सकता है। मंदिर के महंत राम नारायण दास शास्त्री ने बताया कि यज्ञ व कथा की शुरुआत श्री श्री 1008 दुर्गा दास महाराज ने की थी। तब से इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होता आ रहा है। क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा भाईचारे को बढ़ाते हुए सभी धर्म प्रेमियों के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। उन्होंने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से कथा में भाग लेने की प्रार्थना की।
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