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माता-पिता और संत बताते हैं जीवन जीने की कला: आचार्य
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अखनूर के गांव नरसिंह पुरा में अति महाविष्णु यज्ञ का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। गांव नरसिंह पुरा में अति महाविष्णु यज्ञ में मंगलवार को कथावाचक विमल आचार्य ने कहा कि आज समाज में अराजकता व्याप्त है। आज कोई भी मनुष्य नियमित जीवन नहीं जी रहा। असल बात यह है कि जीवन जीना भी एक कला है। इस कला को माता-पिता, संत और शास्त्र बतलाते हैं। इसे हम धर्मानुसार जीवन जीना भी कह सकते हैं। इसके द्वारा सुखी जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई अपना धर्म छोड़कर कृष्णभावनामृत में काम करता है और फिर काम पूरा न होने के कारण गिर जाता है तो इसमें उसे क्या हानि? और यदि कोई अपने भौतिक कार्यों को पूरा करता है तो इससे उसे क्या लाभ होगा? भौतिक कार्य तथा उनके फल शरीर के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। लेकिन, कृष्णभावनामृत में किया गया कार्य मनुष्य को इस शरीर के नष्ट होने पर भी पुनः कृष्णभावनामृत तक ले जाता है। कम से कम इतना तो निश्चित है कि अगले जन्म में उसे सुसंस्कृत ब्राह्मण परिवार में या धनीमानी कुल में मनुष्य का शरीर प्राप्त हो सकेगा। इससे उसे भविष्य में ऊपर उठने का अवसर प्राप्त हो सकेगा। कृष्णभावनामृत में संपन्न कार्य का यही अनुपम गुण है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। गांव नरसिंह पुरा में अति महाविष्णु यज्ञ में मंगलवार को कथावाचक विमल आचार्य ने कहा कि आज समाज में अराजकता व्याप्त है। आज कोई भी मनुष्य नियमित जीवन नहीं जी रहा। असल बात यह है कि जीवन जीना भी एक कला है। इस कला को माता-पिता, संत और शास्त्र बतलाते हैं। इसे हम धर्मानुसार जीवन जीना भी कह सकते हैं। इसके द्वारा सुखी जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई अपना धर्म छोड़कर कृष्णभावनामृत में काम करता है और फिर काम पूरा न होने के कारण गिर जाता है तो इसमें उसे क्या हानि? और यदि कोई अपने भौतिक कार्यों को पूरा करता है तो इससे उसे क्या लाभ होगा? भौतिक कार्य तथा उनके फल शरीर के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। लेकिन, कृष्णभावनामृत में किया गया कार्य मनुष्य को इस शरीर के नष्ट होने पर भी पुनः कृष्णभावनामृत तक ले जाता है। कम से कम इतना तो निश्चित है कि अगले जन्म में उसे सुसंस्कृत ब्राह्मण परिवार में या धनीमानी कुल में मनुष्य का शरीर प्राप्त हो सकेगा। इससे उसे भविष्य में ऊपर उठने का अवसर प्राप्त हो सकेगा। कृष्णभावनामृत में संपन्न कार्य का यही अनुपम गुण है।
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