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दूसरों के दोष देखने की आदत से दुखी होता है जीवन: सुरेश शास्त्री
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गांव चन्नी टरगवाल में 21 कुंडीय महायज्ञ सप्ताह की शुरूआत
पहले दिन निकाली कलश यात्रा, सैकड़ों ने दी यज्ञ में आहुति
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। गांव चन्नी टरगवाल में सोमवार को 21 कुंडीय महायज्ञ सप्ताह की शुरूआत हुई। महंत सुरेश शास्त्री की अगुवाई में कलश यात्रा निकली गई, जो गांव के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरी। चिनाब दरिया से जल लाकर यज्ञ स्थल पर इनकी स्थापना की गई। 21 कुंडीय महायज्ञ 24 मई तक चलेगा, जिसमें कथावाचक सुरेश शास्त्री प्रवचन करेंगे। सोमवार को यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने आहुति दी।
कथावाचक ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने अंदर दोष नहीं दिख पाता है। जबकि, हमें दूसरों का दोष देखने में आनंद आता है। इस आदत के कारण जीवन बहुत दुखी होता है। किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए। जब हम किसी की बुराई करते हैं, तो हमें बुरे कर्मों के फल का भागीदार बनना पड़ता है। यदि हम कोई अच्छे कर्म करते हैं, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं। हम उसके अच्छे कर्मों का फल भी प्राप्त करेंगे। हमें अच्छा बनने और बुराई से बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निजी धर्म में दृढ़ता होती है, तो मन में संकल्प करें कि किसी की निंदा नहीं करूंगा, बुराई नहीं करूंगा, किसी से कोई कामना नहीं करूंगा।
कहा कि ईर्ष्या की आग से अपने व्यक्तित्व को न जलाएं। अधिकांश लोग अन्य व्यक्ति की किसी विशेष वस्तु को देखकर उसके बारे में सोचते हैं। यह भावना धीरे-धीरे ईर्ष्या का रूप ले लेती है।
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पहले दिन निकाली कलश यात्रा, सैकड़ों ने दी यज्ञ में आहुति
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। गांव चन्नी टरगवाल में सोमवार को 21 कुंडीय महायज्ञ सप्ताह की शुरूआत हुई। महंत सुरेश शास्त्री की अगुवाई में कलश यात्रा निकली गई, जो गांव के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरी। चिनाब दरिया से जल लाकर यज्ञ स्थल पर इनकी स्थापना की गई। 21 कुंडीय महायज्ञ 24 मई तक चलेगा, जिसमें कथावाचक सुरेश शास्त्री प्रवचन करेंगे। सोमवार को यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने आहुति दी।
कथावाचक ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने अंदर दोष नहीं दिख पाता है। जबकि, हमें दूसरों का दोष देखने में आनंद आता है। इस आदत के कारण जीवन बहुत दुखी होता है। किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए। जब हम किसी की बुराई करते हैं, तो हमें बुरे कर्मों के फल का भागीदार बनना पड़ता है। यदि हम कोई अच्छे कर्म करते हैं, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं। हम उसके अच्छे कर्मों का फल भी प्राप्त करेंगे। हमें अच्छा बनने और बुराई से बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निजी धर्म में दृढ़ता होती है, तो मन में संकल्प करें कि किसी की निंदा नहीं करूंगा, बुराई नहीं करूंगा, किसी से कोई कामना नहीं करूंगा।
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कहा कि ईर्ष्या की आग से अपने व्यक्तित्व को न जलाएं। अधिकांश लोग अन्य व्यक्ति की किसी विशेष वस्तु को देखकर उसके बारे में सोचते हैं। यह भावना धीरे-धीरे ईर्ष्या का रूप ले लेती है।
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