गर्मियों में पानी की बूंद-बूंद को होंगे मोहताज
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नदियों और दरियाओं की भरमार वाली रियासत जम्मू कश्मीर में पेयजल के लिए हाहाकार है। कहने और लिखने में चाहे अटपटा लगे, लेकिन यह पूरी तरह से सत्य है। अकेले शीतकालीन राजधानी जम्मू में ही तीन लाख गैलन ( तीन एमजीडी) रोजाना के हिसाब से पानी की कमी पड़ रही है।
तापमान बढ़ने के साथ-साथ पेयजल की मांग बढ़ती जाएगी और अंतर में भी बढ़ोतरी होने से पानी के लिए लोगों को तरसने को मजबूर होना पड़ेगा।
जम्मू में तवी नदी के अलावा करीब 170 ओवर हैड टैंक और सभी स्रोतों को मिलाकर पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग करीब 43 मिलियन गैलन डेली पानी की उपलब्धता करवा पा रहा है, जबकि पेयजल की जरूरत 46 मिलियन गैलन को भी पार कर चुकी है।
करीब तीन लाख गैलन के करीब पेयजल की किल्लत गर्मियों में बड़ा अंतर बना देती है। हालात यह हैं कि पेयजल की क्षमता बढ़ाने के लिए चिनाब परियोजना का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में है। जापान इंटरनेशनल बैंक की फंडिंग पर यह सारी परियोजना अटकी हुई है।
पानी के पर्याप्त टैंकर तक नहीं
इस परियोजना को जम्मू शहर में अगले 25 सालों को ध्यान में रखते हुए तैयार तो किया गया, लेकिन एशियन डेवलपमेंट बैंक के परियोजना को फंडिंग से इंकार के बाद यह परियोजना अब जापान इंटरनेशनल बैंक की फंडिंग पर अटकी पड़ी है।
अगर परियोजना मंजूर भी होती है तो कई साल इसके निर्माण में लग जाएंगे और ऐसे में पेयजल की मांग और उपलब्धता में अंतर को कम करने का तरीका न तो सरकार ढूंढ पा रही है और न ही विभाग।
जम्मू शहर के तेजी से हो रहे विस्तारीकरण और पानी की किल्लत वाले इलाकों में समय पर पेयजल की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से करने के लिए टैंकरों की भी कमी है।
जम्मू शहर में पीएचई विभाग के पास केवल 22 पानी के टैंकर हैं, जो कि नगर निगम क्षेत्राधिकार के 71 वार्डों में ही कम पड़ जाते हैं। जम्मू जिला तो 11 विधानसभा क्षेत्रों पर आधारित है।
विभाग को गर्मियों में निजी टैंकरों को किराये पर लेना पड़ता है। पीएचई विभाग के पास टैंकरों की कमी को दूर करने की भी सख्त जरूरत है।
पेयजल की बर्बादी पर रोक नहीं
पेयजल की बर्बादी पर रोक नहीं लग पा रही है। पुराने कंडम हो चुके पाइपों से तो पानी की बर्बादी होती ही है। इसके अलावा पेयजल का इस्तेमाल गाड़ियां धोने, पौधों को पानी देने आदि के लिए किए जाने पर भी विभाग उचित कदम उठाने में नाकाम रहा है।
बिजली किल्लत भी सप्लाई में बाधा
पेयजल की सप्लाई पूरी तरह से बिजली रहने पर निर्भर करती है। गर्मी के मौसम में बिजली की अघोषित कटौती बढ़ने से इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ता है।
पेयजल का शार्टफाल जम्मू शहर में है। चिनाब पेयजल परियोजना के लिए जापान इंटरनेशनल बैंक से फंड मंजूर होने के बाद शहर में पेयजल की किल्लत दूर हो जाएगी। पेयजल की सप्लाई के लिए बिजली की नियमित आपूर्ति अहम है। बिजली कटौती पर पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
सुशील आइमा, चीफ इंजीनियर, पीएचई विभाग, जम्मू