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शोपियां फायरिंग: सेना ने कार्रवाई को सही ठहराया, कहा- नहीं चलाते गोली तो मारे जाते
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
Updated Thu, 01 Feb 2018 01:37 AM IST
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सेना ने कश्मीर के शोपियां फायरिंग मामले में अपनी कार्रवाई को जायज ठहराया है। सेना की आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक, उसने करीब 200 पत्थरबाजों की भीड़ की करतूत आखिरी समय तक बर्दाश्त की। आखिरकार सेना को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, नहीं तो भीड़ 10 गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों और अधिकारियों को मारकर उनसे हथियार छीन सकती थी। सेना ने यह रिपोर्ट जम्मू-कश्मीर पुलिस को दे दी है। वहीं, पुलिस को बयान दर्ज करवाते हुए पत्थरबाजी में क्षतिग्रस्त वाहन के फोटोग्राफ भी सौंपे हैं।
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आंतरिक रिपोर्ट में कहा - आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोलियां
सूत्रों के मुताबिक, सेना ने कहा कि घटना के समय भीड़ को मौखिक चेतावनी दी गई। भीड़ के उग्र होने पर ही सिंगल शॉट वार्निंग फायर किए गए थे। तभी वाहनों पर पेट्रोल बम फेंका गया और आसपास के घरों से पत्थर बरसाए गए। इसमें एक जेसीओ के सिर पर चोट लगी। हालात बेकाबू होते देख भीड़ पर फायरिंग की गई। एसएसपी शोपियां एएस दिनकर ने बताया कि सेना का बयान दर्ज कर लिया गया है। इसके आधार पर जांच की जाएगी। काउंटर एफआईआर के बारे में उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस की सौंपी रिपोर्ट, बयान भी दर्ज कराए
इससे पहले, उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबु ने कहा है कि पुलिस अपनी जांच कर रही है। बेहतर होता कि पुलिस बिना किसी नाम के एफआईआर दर्ज करती। सेना ने यह साफ कर दिया है कि गोलीबारी के समय नामजद मेजर घटनास्थल से दूर थे। उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने सेना के पक्ष को संज्ञान में ले लिया है। सेना अपनी तरफ से काउंटर एफआईआर करने के पक्ष में नहीं है।
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'गोली नहीं चलाते तो मारे जाते, लूटे जा सकते थे हथियार'
कश्मीर में सेना सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) के तहत काम करती है। उसे यह सुरक्षा कवच ऐसे हालात के लिए ही दिया गया है। उधर, मेजर के खिलाफ एफआईआर को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों दलों पीडीपी और भाजपा के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। भाजपा विधायक मेजर के खिलाफ केस खारिज कर भीड़ पर एफआईआर करने का मुद्दा उठा रहे हैं।
राजनीति बयानबाजी से सेना में रोष
इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी से सेना में रोष है। सेना के मुताबिक, अशांत क्षेत्र में सेना की कार्रवाई तकनीकी तौर पर की जाती है। इसमें राजनीतिक का दखल ठीक नहीं।
क्या हुआ था?
27 जनवरी को शोपियां में हिंसा के दौरान सेना की फायरिंग में दो युवक मारे गए थे। इसके बाद पुलिस ने मेजर आदित्य व अन्य के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। डीजीपी एसपी वैद ने कहा, एफआईआर में सेना की 10 गढ़वाल रेजीमेंट का नाम शामिल है, जिसको उस समय मेजर आदित्य लीड कर रहे थे। सीएम ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।