कश्मीरी युवकों को हिंदू राष्ट्र का खौफ दिखा रहे अलगाववादी
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अलग-थलग पड़ रहे अलगाववादियों ने अब युवकों को भड़काने के लिए नए पैंतरे आजमाना शुरू कर दिया है। कश्मीरी अवाम को अब हिंदू राष्ट्र का खौफ दिखा आंदोलन के लिए अपीलें की जा रहीं हैं। बंद और हड़ताल के कलेंडरों के बेअसर होने के बाद अलगाववादी गुटों को अप्रासंगिक होने का खतरा सताने लगा है।
लिहाजा, विभिन्न धड़ों में बंटे अलगाववादी नेता अब आपसी एकता के लिए भी कवायद में जुट गए हैं। हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक फिलहाल एक साथ काम कर रहे हैं। लेकिन, अब इन गुटों के विलय की कोशिशें भी तेज हुईं हैं।
अलगाववादियों की ओर से जारी संयुक्त अपीलों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत के बयान को आधार बनाकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने का खौफ पैदा करने को कोशिश की जा रही है। गिलानी, मीरवाइज और यासिन के बयानों में कहा गया है कि जम्मू में भागवत ने भारत को हिंदू राष्ट्र बताया है। आशंका जताई गई है कि अगर ऐसा हुआ तो कश्मीरियों पर खतरा बढ़ जाएगा।
नए पैंतरें को कश्मीरी युवकों ने नहीं दी तवज्जो
हालांकि, भागवत ने हिंदुत्व को जीवन पद्धति और संस्कार से जुड़ा विषय बताकर यहां रहने वालों को हिंदी बताया था। लेकिन, अलगाववादी इसे अपने तरीके से पारिभाषित कर रहे हैं। अलगाववादियों की इस नए पैंतरे को कश्मीरी युवा फिलहाल तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
अलगाववादी शब्बीर शाह और अब्दुल गनी भट ने गिलानी, मीरवाइज और यासिन समेत तमाम गुटों को एक बैनर तले आकर संयुक्त कमेटी के तहत काम करने की अपील की है। चार महीने तक छाई अशांति के बाद अब घाटी में जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। हालात में यह बदलाव अलगाववादियों को अपनी सियासत के अनुकूल नहीं लगता है।
घाटी में सामान्य होने लगे हालात
श्रीनगर, अनंतनाग, शोपियां और बांदीपोरा समेत तमाम इलाकों में अब बाजारों में रौनक लौट रही है। सड़कों पर निजी वाहनों की भीड़ हर जगह दिखती है। दुकानें खुल चुकी हैं और कई हमले झेल चुके पांपोर में केसर और अखरोट के व्यापारी माल बाहर भेजने में मशगूल हो गए हैं।
यही कारण है कि अलगाववादियों को लाल चौक मार्च स्थगित करना पड़ा। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं की लगभग शत प्रतिशत उपस्थिति से भी अलगाववादियों को वजूद का खतरा सता रहा है।