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जम्मू-कश्मीर के इतिहास को फिर से लिखने की जरूरत
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के इतिहास को फिर से लिखने की जरूरत है। यह बात बुधवार कोे जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में वीसी प्रो. उमेश राय ने कही।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यवाहरिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम करवाने के लिए इतिहास विभाग ने सराहनीय प्रयास किया है। प्रदेश के इतिहास को सामान्य और विशेष रूप से लिखना होगा, जिसमें महाराजा गुलाब सिंह का गौरवमयी इतिहास भी शामिल होगा। लोगों को डोगराें के इतिहास से अवगत करवाने की आवश्यकता है। इस कारण इसे फिर से आकार देना होगा, ताकि महाराजाओं का इतिहास को लोग जान सकें।
मुख्य वक्ता आशुतोष भटनागर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर भारत का भिन्न अंग है। महाराजा और उनके सेनापतियों ने भारत की सांस्कृतिक सीमाओं को पुन: प्राप्त किया। इस क्षेत्र के इतिहास को लोगों के सामने लाने की जरूरत है। प्रो. रघुवेंद्र तंवर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने भी वीसी के बयान का समर्थन किया। इस मौके पर पद्मश्री शिव निर्मोही, पद्मश्री केएन पंडिता, डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री आदि उपस्थित रहे।
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महाराजा गुलाब सिंह के इतिहास से रूबरू हो रहे विद्वान
जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र और महाराजा गुलाब सिंह अनुसंधान अध्ययन केंद्र के सहयोग से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है। इसमें देशभर के विद्वान भाग ले रहे हैं। उन्हें महाराजा गुलाब सिंह के इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। बुधवार को कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुमन ने अतिथियों का स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यवाहरिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम करवाने के लिए इतिहास विभाग ने सराहनीय प्रयास किया है। प्रदेश के इतिहास को सामान्य और विशेष रूप से लिखना होगा, जिसमें महाराजा गुलाब सिंह का गौरवमयी इतिहास भी शामिल होगा। लोगों को डोगराें के इतिहास से अवगत करवाने की आवश्यकता है। इस कारण इसे फिर से आकार देना होगा, ताकि महाराजाओं का इतिहास को लोग जान सकें।
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मुख्य वक्ता आशुतोष भटनागर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर भारत का भिन्न अंग है। महाराजा और उनके सेनापतियों ने भारत की सांस्कृतिक सीमाओं को पुन: प्राप्त किया। इस क्षेत्र के इतिहास को लोगों के सामने लाने की जरूरत है। प्रो. रघुवेंद्र तंवर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने भी वीसी के बयान का समर्थन किया। इस मौके पर पद्मश्री शिव निर्मोही, पद्मश्री केएन पंडिता, डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री आदि उपस्थित रहे।
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महाराजा गुलाब सिंह के इतिहास से रूबरू हो रहे विद्वान
जम्मू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र और महाराजा गुलाब सिंह अनुसंधान अध्ययन केंद्र के सहयोग से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है। इसमें देशभर के विद्वान भाग ले रहे हैं। उन्हें महाराजा गुलाब सिंह के इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। बुधवार को कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुमन ने अतिथियों का स्वागत किया।