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Jammu News: खिलौनों से मुस्कान बांट रहीं मोहिनी
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सतवारी में महिलाओं को खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दे रहीं मोहिनी देवी। श्रोत स्वयं
- फोटो : मनीष शर्मा
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- दो वर्ष पहले शुरू किए स्वरोजगार में 10 से अधिक महिलाओं को जोड़ा
- हर माह 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सतवारी की मोहिनी देवी ने खुद को स्वावलंबी बनाने के लिए 10 वर्ष पहले खिलौने बनाने का काम सीखा। उम्मीद संस्था ने उनके हुनर को निखारने के लिए प्रशिक्षण दिया। दो वर्ष पहले खिलौने बनाने का काम शुरू किया। परिवार के साथ और सहयाेगी महिलाओं की मेहनत रंग लाई। मोहिनी के साथ आज 10 से अधिक महिलाएं खिलौने बनाने के काम कर रही हैं। वे खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनीं हैं।
मोहिनी ने बताया कि बच्चों के लिए खिलौने बनाकर बेचना उनके चेहरे पर मुस्कान लाने जैसा ही है। कृत्रिम बालों और फर से खिलौने बनाने के लिए उम्मीद संस्थान ने प्रशिक्षण दिया। जब खुद को पूरी तरह तैयार कर लिया तो सोचा आसपास की महिलाओं को भी जागरूक करें। इससे वे भी स्वावलंबी बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार का सहारा बनें। मोहिनी ने बताया कि इस काम में पति का भी पूरा सहयोग मिला। उन्होंने हर कदम पर उत्साह बढ़ाया। बीते दो वर्ष में उन्होंने जम्मू में होने वाली प्रदर्शनियों के साथ ही लुधियाना, हरियाणा के सूरजकुंड व अमृतसर जैसे बड़े शहरों में खुद के बनाए खिलौनों के स्टॉल लगाए और आर्थिक रूप से इसमें काफी लाभ हुआ। मोहिनी ने बताया कि वह अब खिलौने बनाने का प्रशिक्षण भी देने लगी हैं। समूह से जुड़ी 10 महिलाएं औसतन हर माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। इसको शुरू करने के लिए उन्होंने सरकारी स्तर पर कोई ऋण की सुविधा नहीं ली। उनके खिलौने बाजार में उपलब्ध खिलौनों से काफी सस्ते व टिकाऊ होते हैं।
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- हर माह 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सतवारी की मोहिनी देवी ने खुद को स्वावलंबी बनाने के लिए 10 वर्ष पहले खिलौने बनाने का काम सीखा। उम्मीद संस्था ने उनके हुनर को निखारने के लिए प्रशिक्षण दिया। दो वर्ष पहले खिलौने बनाने का काम शुरू किया। परिवार के साथ और सहयाेगी महिलाओं की मेहनत रंग लाई। मोहिनी के साथ आज 10 से अधिक महिलाएं खिलौने बनाने के काम कर रही हैं। वे खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनीं हैं।
मोहिनी ने बताया कि बच्चों के लिए खिलौने बनाकर बेचना उनके चेहरे पर मुस्कान लाने जैसा ही है। कृत्रिम बालों और फर से खिलौने बनाने के लिए उम्मीद संस्थान ने प्रशिक्षण दिया। जब खुद को पूरी तरह तैयार कर लिया तो सोचा आसपास की महिलाओं को भी जागरूक करें। इससे वे भी स्वावलंबी बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार का सहारा बनें। मोहिनी ने बताया कि इस काम में पति का भी पूरा सहयोग मिला। उन्होंने हर कदम पर उत्साह बढ़ाया। बीते दो वर्ष में उन्होंने जम्मू में होने वाली प्रदर्शनियों के साथ ही लुधियाना, हरियाणा के सूरजकुंड व अमृतसर जैसे बड़े शहरों में खुद के बनाए खिलौनों के स्टॉल लगाए और आर्थिक रूप से इसमें काफी लाभ हुआ। मोहिनी ने बताया कि वह अब खिलौने बनाने का प्रशिक्षण भी देने लगी हैं। समूह से जुड़ी 10 महिलाएं औसतन हर माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। इसको शुरू करने के लिए उन्होंने सरकारी स्तर पर कोई ऋण की सुविधा नहीं ली। उनके खिलौने बाजार में उपलब्ध खिलौनों से काफी सस्ते व टिकाऊ होते हैं।
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