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खुलेगा कारगिल के आर्यों की लंबी उम्र का राज
विजय नारायण सिंह, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 29 May 2016 11:26 AM IST
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कारगिल के धाहनु बेल्ट में रहने वाले आर्यों की उम्र करीब 75 से 80 साल होती है।
- फोटो : File Photo
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कारगिल के धाहनु बेल्ट में रहने वाले आर्यों की लंबी उम्र का पता लगाया जाएगा। इनकी औसत उम्र करीब 75 से 80 साल होती है। ये आज से करीब 23 सौ पहले सिंकदर की सेना के साथ आए थे।
युद्ध में सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की चंद्रगुप्त मौर्य से पराजय के बाद कुछ सैनिक यहीं रह गए थे। उन्हीं के वंशज आज कारगिल में आबाद हैं। यहां इनकी पहचान ब्रोकपा ट्राइबल के रूप में है। अब इनके जीनोम पूल और खानपान की आदतों का अध्ययन कर यह पता लगाया जाएगा कि इनके स्वस्थ और लंबे समय तक जीवित रहने का राज क्या है।
जम्मू विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के पीएचडी स्कालर अकबर खान ने इन ब्रोकपा ट्राइबल के जीनोम पूल पर शोध की तैयारी शुरू की है। पूरी दुनिया से लगभग कटे रहने वाले इन लोगों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। एंथ्रोपोलिजिस्ट और समाजशास्त्री इन्हें आर्यों के वंशज मानते हैं।
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खान ने बताया कि आम भारतीय की औसत उम्र करीब 65 साल है, लेकिन ब्रोकपा की औसत आयु करीब 75 से 80 साल है। इनकी एजिंग प्रक्रिया काफी धीमी है। शोध का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इनका जीन पूल पूरी तरह शुद्ध है क्योंकि किसी अन्य समुदाय के साथ इनका क्रास नहीं हुआ है। हालांकि अब गिनती के कुछ लोगों ने शादियां की हैं। शिक्षा से भी यह समुदाय काफी वर्षोँ तक दूर रहा है।
उन्होंने बताया कि कारगिल के धाहनु बेल्ट के छह गांवों में ये रहते हैं। इनकी आबादी करीब तीन हजार है। पहले यह लोग सूर्य की पूजा करते थे। साथ ही जूपिटर नाम के वृक्ष की पूजा करते थे, लेकिन अब ये बौद्ध धर्म स्वीकार कर चुके हैं।
पहले जब ये सूर्य की पूजा करते थे तब भी किसी के निधन के बाद शवदाह करते थे। अब भी अंतिम क्रिया की परंपरा शवदाह की ही है। इनकी भाषा में मेसोडोनिया के काफी शब्द मिलते हैं। इनकी लंबाई 6 फुट या उससे अधिक होती है। ऊंची नाक, नीली आंखें और गोरा चिट्टा रंग इनके आर्य होने की पुष्टि करता है।
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युद्ध में सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की चंद्रगुप्त मौर्य से पराजय के बाद कुछ सैनिक यहीं रह गए थे। उन्हीं के वंशज आज कारगिल में आबाद हैं। यहां इनकी पहचान ब्रोकपा ट्राइबल के रूप में है। अब इनके जीनोम पूल और खानपान की आदतों का अध्ययन कर यह पता लगाया जाएगा कि इनके स्वस्थ और लंबे समय तक जीवित रहने का राज क्या है।
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जम्मू विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के पीएचडी स्कालर अकबर खान ने इन ब्रोकपा ट्राइबल के जीनोम पूल पर शोध की तैयारी शुरू की है। पूरी दुनिया से लगभग कटे रहने वाले इन लोगों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। एंथ्रोपोलिजिस्ट और समाजशास्त्री इन्हें आर्यों के वंशज मानते हैं।
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खान ने बताया कि आम भारतीय की औसत उम्र करीब 65 साल है, लेकिन ब्रोकपा की औसत आयु करीब 75 से 80 साल है। इनकी एजिंग प्रक्रिया काफी धीमी है। शोध का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इनका जीन पूल पूरी तरह शुद्ध है क्योंकि किसी अन्य समुदाय के साथ इनका क्रास नहीं हुआ है। हालांकि अब गिनती के कुछ लोगों ने शादियां की हैं। शिक्षा से भी यह समुदाय काफी वर्षोँ तक दूर रहा है।
उन्होंने बताया कि कारगिल के धाहनु बेल्ट के छह गांवों में ये रहते हैं। इनकी आबादी करीब तीन हजार है। पहले यह लोग सूर्य की पूजा करते थे। साथ ही जूपिटर नाम के वृक्ष की पूजा करते थे, लेकिन अब ये बौद्ध धर्म स्वीकार कर चुके हैं।
पहले जब ये सूर्य की पूजा करते थे तब भी किसी के निधन के बाद शवदाह करते थे। अब भी अंतिम क्रिया की परंपरा शवदाह की ही है। इनकी भाषा में मेसोडोनिया के काफी शब्द मिलते हैं। इनकी लंबाई 6 फुट या उससे अधिक होती है। ऊंची नाक, नीली आंखें और गोरा चिट्टा रंग इनके आर्य होने की पुष्टि करता है।