{"_id":"68c09bac866171add902698d","slug":"school-problems-jammu-news-c-10-jam1003-708771-2025-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: जर्जर भवन, खतरे के साए में तराशा जा रहा बच्चों का भविष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: जर्जर भवन, खतरे के साए में तराशा जा रहा बच्चों का भविष्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारिश के बाद उदयवाला, पीरखो, गुज्जर बस्ती, सतवारी सहित कई अन्य स्कूलों की हालत खस्ता
- पीरखो स्कूल की छात्रा रिंकी, दीपिका के साथ पीरखो, उदयवाला, सतवारी, गुज्जर बस्ती, सतवारी कैंट का फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। संभाग के बच्चों का भविष्य जर्जर भवनों में खतरे के बीच तराशने की तैयारी की जा रही है। वह भी इस स्थिति में जब सरकार शिक्षा पर पानी की तरह धन बहा रही है। प्रधानाचार्य, शिक्षकों ने स्कूलों को तो चमका दिया लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई है। हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद शहर के कई स्कूल जर्जर हालत में हैं। कइयों की छतों से सीमेंट गिर रहा है तो कइयों में दरारें आ गई हैं।
शहर के डोगरा हाल स्कूल की छत गिरने के बाद भी सबक नहीं लिया गया। शहर के राजकीय बाल हाई स्कूल उदयवाला, प्राथमिक विद्यालय पीरखो, प्राथमिक विद्यालय गुज्जर बस्ती व सरकारी कन्या हाई स्कूल सतवारी सहित कई अन्य स्कूलों की पड़ताल के दौरान इनकी हालत खस्ता पाई गई। सतवारी स्कूल की छत की सीलिंग गिर रही है। इन स्कूलों में 600 से अधिक बच्चे शिक्षा ले रहे हैं।
-- -- -
बाढ़ ने बढ़ाईं बच्चों की
मुश्किलें, अभिभावक लाचार
जम्मू में हाल ही हुई भारी बारिश और बाढ़ में बच्चों की कॉपी-किताबें, बस्ते, यूनिफॉर्म भी बह गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक रूप से बेहाल अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा कि वे बच्चों का भविष्य बनाने के लिए पढ़ाई की सामग्री कैसे जुटाएं।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने निरीक्षण के बाद जल्द स्कूल खोलने का फैसला लिया है लेकिन ये बच्चे बगैर कॉपी-किताब, बस्ते, यूनिफॉर्म आदि के स्कूल कैसे जाएंगे, यह बड़ा सवाल है। पीरखो स्कूल में कक्षा दो में पढ़ने वाली दीपिका के दिन अपनी उम्र के बच्चों के साथ मलबे के ढेर में खेलते बीत रहे हैं। अभी तक उनके घर की सफाई नहीं हो पाई है। घर में जितना सामान था सब खराब हो गया है। ऐसे में दीपिका बिना किताबों के पढ़ाई कैसे करेगी। इसी स्कूल में कक्षा चार में पढ़ने वाली रिंकी अपना घर दिखाते हुए कहती है कि सब कुछ पानी ने खराब कर दिया। माता-पिता घर की सफाई में जुटे हैं। मलबा अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। अब किताबें खरीदी जाएंगी तो ही वह पढ़ पाएंगी, क्योंकि मलबे में सब कॉपी-किताबें खराब हो गई हैं।
-- -
सरकार से मदद मिलने का इंतजार जुल्लाका मोहल्ला के हायर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाले कन्हैया कुमार कहते हैं कि तवी के पानी ने उनके घर के सारे सामान को खराब कर दिया है। उनकी किताबें भी साबुत नहीं बची। उन्हें इंतजार है कि शायद सरकार से इस संबंध में कोई मदद मिले। जब तक किताबें नहीं मिलती पढ़ाई टेढ़ी खीर है। इसी स्कूल में पढ़ने वाली कंचन देवी अपने भाई-बहनों के साथ स्कूल जाती थी। अभी स्कूल बंद है लेकिन अगर स्कूल खुल जाते हैं तो भी वह पढ़ेगी कैसे, यह उसके सामने प्रश्न है। बकौल कंचन मम्मी-पापा के लिए फिर से कॉपी-किताबें जुटाना एक मुश्किल काम होगा।
-- -- -
मंगलवार को जम्मू शहर से लेकर पलांवाला तक के स्कूलों का दौरा किया। इसमें कुछ स्कूलों की हालात एकदम सही पाई गई। एक-दो स्कूलों में अभी समस्या बनी हुई है। जल्द ही वहां शिक्षा बहाल की जाएगी। रही बात काॅपी-किताबों की तो स्कूल खूलने के बाद जिन स्कूलों में ऐसी समस्या सामने उभरेगी उसका कुछ न कुछ हल निकाला जाएगा।
- अजीत शर्मा, सीईओ, जम्मू
विज्ञापन
- पीरखो स्कूल की छात्रा रिंकी, दीपिका के साथ पीरखो, उदयवाला, सतवारी, गुज्जर बस्ती, सतवारी कैंट का फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। संभाग के बच्चों का भविष्य जर्जर भवनों में खतरे के बीच तराशने की तैयारी की जा रही है। वह भी इस स्थिति में जब सरकार शिक्षा पर पानी की तरह धन बहा रही है। प्रधानाचार्य, शिक्षकों ने स्कूलों को तो चमका दिया लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई है। हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद शहर के कई स्कूल जर्जर हालत में हैं। कइयों की छतों से सीमेंट गिर रहा है तो कइयों में दरारें आ गई हैं।
शहर के डोगरा हाल स्कूल की छत गिरने के बाद भी सबक नहीं लिया गया। शहर के राजकीय बाल हाई स्कूल उदयवाला, प्राथमिक विद्यालय पीरखो, प्राथमिक विद्यालय गुज्जर बस्ती व सरकारी कन्या हाई स्कूल सतवारी सहित कई अन्य स्कूलों की पड़ताल के दौरान इनकी हालत खस्ता पाई गई। सतवारी स्कूल की छत की सीलिंग गिर रही है। इन स्कूलों में 600 से अधिक बच्चे शिक्षा ले रहे हैं।
विज्ञापन
बाढ़ ने बढ़ाईं बच्चों की
मुश्किलें, अभिभावक लाचार
जम्मू में हाल ही हुई भारी बारिश और बाढ़ में बच्चों की कॉपी-किताबें, बस्ते, यूनिफॉर्म भी बह गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक रूप से बेहाल अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा कि वे बच्चों का भविष्य बनाने के लिए पढ़ाई की सामग्री कैसे जुटाएं।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने निरीक्षण के बाद जल्द स्कूल खोलने का फैसला लिया है लेकिन ये बच्चे बगैर कॉपी-किताब, बस्ते, यूनिफॉर्म आदि के स्कूल कैसे जाएंगे, यह बड़ा सवाल है। पीरखो स्कूल में कक्षा दो में पढ़ने वाली दीपिका के दिन अपनी उम्र के बच्चों के साथ मलबे के ढेर में खेलते बीत रहे हैं। अभी तक उनके घर की सफाई नहीं हो पाई है। घर में जितना सामान था सब खराब हो गया है। ऐसे में दीपिका बिना किताबों के पढ़ाई कैसे करेगी। इसी स्कूल में कक्षा चार में पढ़ने वाली रिंकी अपना घर दिखाते हुए कहती है कि सब कुछ पानी ने खराब कर दिया। माता-पिता घर की सफाई में जुटे हैं। मलबा अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। अब किताबें खरीदी जाएंगी तो ही वह पढ़ पाएंगी, क्योंकि मलबे में सब कॉपी-किताबें खराब हो गई हैं।
सरकार से मदद मिलने का इंतजार जुल्लाका मोहल्ला के हायर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाले कन्हैया कुमार कहते हैं कि तवी के पानी ने उनके घर के सारे सामान को खराब कर दिया है। उनकी किताबें भी साबुत नहीं बची। उन्हें इंतजार है कि शायद सरकार से इस संबंध में कोई मदद मिले। जब तक किताबें नहीं मिलती पढ़ाई टेढ़ी खीर है। इसी स्कूल में पढ़ने वाली कंचन देवी अपने भाई-बहनों के साथ स्कूल जाती थी। अभी स्कूल बंद है लेकिन अगर स्कूल खुल जाते हैं तो भी वह पढ़ेगी कैसे, यह उसके सामने प्रश्न है। बकौल कंचन मम्मी-पापा के लिए फिर से कॉपी-किताबें जुटाना एक मुश्किल काम होगा।
मंगलवार को जम्मू शहर से लेकर पलांवाला तक के स्कूलों का दौरा किया। इसमें कुछ स्कूलों की हालात एकदम सही पाई गई। एक-दो स्कूलों में अभी समस्या बनी हुई है। जल्द ही वहां शिक्षा बहाल की जाएगी। रही बात काॅपी-किताबों की तो स्कूल खूलने के बाद जिन स्कूलों में ऐसी समस्या सामने उभरेगी उसका कुछ न कुछ हल निकाला जाएगा।
- अजीत शर्मा, सीईओ, जम्मू