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15 साल पुरानी बसों को बदलने के लिए शुरू की ट्रांसपोर्ट सब्सिडी स्कीम नहीं चढ़ पा रही परवान
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जम्मू। प्रदेश में निजी ट्रांसपोर्टरों के लिए शुरू की गई ट्रांसपोर्ट सब्सिडी स्कीम परवान नहीं चढ़ पाई। करीब 10 महीने के बाद भी सरकार ट्रांसपोर्टरों को स्कीम के प्रति आकर्षित नहीं कर पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण स्कीम की कुछ शर्तें और कोरोना संकट के चलते बीएस-6 माडॅल के वाहनों का नहीं पहुंचना है। जम्मू संभाग में स्कीम के तहत अभी तक एक सौ के करीब ट्रांसपोर्टरों ने ही आवेदन किया है। स्कीम के तहत 15 वर्ष पुरानी बसों को बदलने पर ट्रांसपोर्टरों को सरकार पांच लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी। स्कीम के लिए सरकार ने 25 करोड़ की राशि मंजूर की है।
करीब 10 महीने पहले लांच की गई स्कीम के तहत पहले चरण में सरकार ने जम्मू और श्रीनगर शहरों में दौड़ रही पुरानी डीजल वाली 500 बसों को नई में बदलना था लेकिन कोरोना संक्रमण और ट्रांसपोर्टरों के कम रुझान के कारण सरकार की महत्वाकंक्षी योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश में बीएस-6 मॉडल के वाहन नहीं आ रहे हैं, पुरानी बसों के बदले में ट्रांसपोर्टरों को यही वाहन दिए जाने हैं। इसकी कारण योजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है। योजना के तहत इच्छुक ट्रांसपोर्टरों को बस खरीदने पर जम्मू एंड कश्मीर बैंक से भी ऋण मिलना था।
ये शर्तें जो ट्रांसपोर्टरों को रास नहीं आ रहीं
स्कीम के तहत लाभार्थी को सुनिश्चित करना होगा कि बस से जुड़ी सरकारी फीस जमा हो, यानीकि टोकन टैक्स, पैसेंजर टैक्स, फिटनेस टेस्ट, परमिट फीस और बैंक देनदारी इत्यादि की औपचारिकताएं पूरी हों। इसके अलावा बीमा प्रमाण पत्र समेत परमिट भी समय से नवीनीकृत हो। इधर ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अधिकांश बसों का परिचालन अब बंद होने पर है। ऐसे में बस के सभी दस्तावेजों को पूरा करने पर 50 हजार रुपये तक का खर्च आएगा। वहीं ट्रांसपोटरों का कहना है कि योजना में रखी शर्त में चिह्नित रूटों पर लाभार्थी ट्रांसपोर्टर को कम से कम पांच साल तक बस चलानी है, यह भी उनके लिए घाटे का सौदा है।
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कोट
जम्मू संभाग में सब्सिडी स्कीम के तहत एक सौ के करीब आवेदन आए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीएस-6 मानक के कमर्शियल वाहन प्रदेश नहीं पहुंच पा रहे है। वाहनों के पहुंचने के बाद स्कीम को आगे बढ़ाया जाएगा।
धंतर सिंह, आरटीओ जम्मू
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करीब 10 महीने पहले लांच की गई स्कीम के तहत पहले चरण में सरकार ने जम्मू और श्रीनगर शहरों में दौड़ रही पुरानी डीजल वाली 500 बसों को नई में बदलना था लेकिन कोरोना संक्रमण और ट्रांसपोर्टरों के कम रुझान के कारण सरकार की महत्वाकंक्षी योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश में बीएस-6 मॉडल के वाहन नहीं आ रहे हैं, पुरानी बसों के बदले में ट्रांसपोर्टरों को यही वाहन दिए जाने हैं। इसकी कारण योजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है। योजना के तहत इच्छुक ट्रांसपोर्टरों को बस खरीदने पर जम्मू एंड कश्मीर बैंक से भी ऋण मिलना था।
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ये शर्तें जो ट्रांसपोर्टरों को रास नहीं आ रहीं
स्कीम के तहत लाभार्थी को सुनिश्चित करना होगा कि बस से जुड़ी सरकारी फीस जमा हो, यानीकि टोकन टैक्स, पैसेंजर टैक्स, फिटनेस टेस्ट, परमिट फीस और बैंक देनदारी इत्यादि की औपचारिकताएं पूरी हों। इसके अलावा बीमा प्रमाण पत्र समेत परमिट भी समय से नवीनीकृत हो। इधर ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अधिकांश बसों का परिचालन अब बंद होने पर है। ऐसे में बस के सभी दस्तावेजों को पूरा करने पर 50 हजार रुपये तक का खर्च आएगा। वहीं ट्रांसपोटरों का कहना है कि योजना में रखी शर्त में चिह्नित रूटों पर लाभार्थी ट्रांसपोर्टर को कम से कम पांच साल तक बस चलानी है, यह भी उनके लिए घाटे का सौदा है।
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जम्मू संभाग में सब्सिडी स्कीम के तहत एक सौ के करीब आवेदन आए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बीएस-6 मानक के कमर्शियल वाहन प्रदेश नहीं पहुंच पा रहे है। वाहनों के पहुंचने के बाद स्कीम को आगे बढ़ाया जाएगा।
धंतर सिंह, आरटीओ जम्मू