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Jammu News: महिला की जहरीली वस्तु से मौत के मामले में आरोपी पति की जमानत याचिका खारिज
Wed, 05 Nov 2025 02:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 05 Nov 2025 02:30 AM IST
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अभियुक्त के खिलाफ पुलिस थाना सांबा में मामला दर्ज, पत्नी की हत्या का है आरोप
सांबा। सांबा की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद शर्मा की अदालत ने पिंकू चौधरी पुत्र रुमाल सिंह निवासी नेयाडी सांबा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अभियुक्त के खिलाफ पुलिस थाना सांबा में मामला दर्ज है जिसमें उस पर पत्नी की हत्या का आरोप है।
अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियुक्त निर्दोष है और उसे झूठे एवं निराधार मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अभियुक्त आठ माह से हिरासत में है और उसकी दो छोटी बच्चियों की देखभाल के लिए पिता की जरूरत है। शासकीय अधिवक्ता की तरफ से जमानत याचिका का विरोध कर कहा कि आरोपी पर गंभीर और जघन्य प्रकृति के अपराध के तहत मामला दर्ज है। इसके लिए मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
अदालत ने यह माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मृतका ने मरने से पहले बयान में कहा था कि उसे जहर दिया गया था लेकिन जांच में कोई नाम सामने नहीं आया है। अदालत ने कहा कि अभियुक्त मृतका का पति था और उनके बीच लंबे समय से वैवाहिक मतभेद चल रहे थे। ऐसे में जमानत देने से न्याय में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और साक्ष्यों की स्थिति को देखते हुए अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है। इसलिए यह जमानत याचिका अस्वीकार की जाती है।
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सांबा। सांबा की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद शर्मा की अदालत ने पिंकू चौधरी पुत्र रुमाल सिंह निवासी नेयाडी सांबा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अभियुक्त के खिलाफ पुलिस थाना सांबा में मामला दर्ज है जिसमें उस पर पत्नी की हत्या का आरोप है।
अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियुक्त निर्दोष है और उसे झूठे एवं निराधार मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अभियुक्त आठ माह से हिरासत में है और उसकी दो छोटी बच्चियों की देखभाल के लिए पिता की जरूरत है। शासकीय अधिवक्ता की तरफ से जमानत याचिका का विरोध कर कहा कि आरोपी पर गंभीर और जघन्य प्रकृति के अपराध के तहत मामला दर्ज है। इसके लिए मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
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अदालत ने यह माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मृतका ने मरने से पहले बयान में कहा था कि उसे जहर दिया गया था लेकिन जांच में कोई नाम सामने नहीं आया है। अदालत ने कहा कि अभियुक्त मृतका का पति था और उनके बीच लंबे समय से वैवाहिक मतभेद चल रहे थे। ऐसे में जमानत देने से न्याय में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और साक्ष्यों की स्थिति को देखते हुए अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है। इसलिए यह जमानत याचिका अस्वीकार की जाती है।
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