Rubaiya Sayeed: रूबिया अपहरण मामले में यासीन को शारीरिक रूप से जिरह करने की मंजूरी, 20 अक्तूबर को होगी पेशी
रूबिया सईद को आज जम्मू के टाडा कोर्ट में पेश किया गया। रूबिया की बाकी आरोपियों के साथ जिरह की गई है। अब आतंकी एवं प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक से जिरह किया जाना बाकी है।
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण मामले के मुख्य आरोपी यासीन मलिक को टाडा कोर्ट ने शारीरिक रूप से जिरह करने की मंजूरी दे दी है। यासीन को 20 अक्तूबर को जिरह करने के लिए तिहाड़ जेल से जम्मू लाया जाएगा। हालांकि मलिक ने सरकारी वकील लेने से मना करते हुए कहा कि वह गवाहों से सवाल-जवाब खुद करेगा और अपना पक्ष खुद रखेगा।
बुधवार को रूबिया सईद को टाडा कोर्ट में पेशी पर बुलाया गया। रूबिया के सामने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन समेत नौ आरोपियों को पहचान के लिए पेश किया गया। इसके पहले 19 जुलाई 2022 को जब रूबिया कोर्ट में पेश हुई थीं।
तब उन्होंने अपहरण मामले के मुख्य आरोपी यासीन मलिक के साथ तीन अन्य आरोपियों की पहचान की थी। बता दें कि 32 साल पहले एयरफोर्स के पांच अधिकारियों की हत्या के मामले में यासीन मलिक खुद कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें पेश करने की मांग कर रहा था।
टाडा कोर्ट ने यासीन मलिक समेत सात लोगों पर रूबिया के अपहरण के आरोप तय किए हैं। इनमें यासीन के अलावा अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी, जावेद अहमद मीर, नानाजी उर्फ सलीम, जावेद अहमद जरगर व शौकत अहमद बख्शी शामिल हैं।
बुधवार को इस मामले पर फिर से सुनवाई हुई। यासिन के अलावा अन्य आरोपी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। सीबीआई की वकील मोनिका कोहली ने बताया कि रूबिया सईद को बुधवार को टाडा कोर्ट में पेश किया गया। रूबिया की बाकी आरोपियों के साथ जिरह की गई है।
अब यासीन मलिक से जिरह की जाना बाकी है। यासीन मलिक को 20 अक्तूबर जिरह के लिए बुलाया जाएगा। कोर्ट ने तिहाड़ जेल से यासीन मलिक को पेश करने का आदेश दिया है। जेएन
यह है मामला
1989 में घर लौटते वक्त रूबिया का अपहरण कर लिया गया था। इसके बदले यासीन के संगठन ने पांच आतंकियों को छोड़ने की मांग रखी। सरकार ने इस मांग को मानते हुए पांचों आतंकियों को छोड़ दिया था, लेकिन इसके बाद इस मामले की जांच शुरू की गई और जांच सीबीआई को सौंपी गई।
सीबीआई ने जांच करने के बाद आरोपपत्र दायर किया। अब मामला टाडा कोर्ट में है। यासीन मलिक पर एयरफोर्स के पांच अफसरों की हत्या का केस भी दर्ज है। यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।