जम्मू कश्मीर की विधानसभा में गूंजेगा रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा
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भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि विधायक दल की होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होगी। विधायकों को यह हिदायत होगी कि सदन में शून्यकाल के दौरान वह यह मुद्दा उठाएं। इस बात की जानकारी मांगी जाए कि इन्हें रियासत में बसाने का किस सरकार के कार्यकाल में फैसला हुआ। इन्हें सरकार की ओर से क्या-क्या सुविधाएं दी जाती हैं।
इनकी निगरानी के लिए क्या तंत्र है। देश विरोधी गतिविधियों तथा आपराधिक गतिविधियों में इनकी क्या संलिप्तता है इस बारे में क्या सूचनाएं हैं। क्या इनकी गतिविधियों की नियमित रूप से चेकिंग होती है। विभिन्न इलाकों में सरकारी जमीनों पर इन्हें बसाने की क्या सरकार ने अनुमति दी है।
कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार के स्तर पर पहल संभव
रणनीतिकारों ने बताया कि रोहिंग्या के यहां रहने से डेमोग्राफी में बदलाव की आशंका को भी जोर शोर से उठाया जाएगा। इसके पीछे एक तीर से दो निशाना साधने की रणनीति होगी। एक तो रोहिंग्या को हटाने के लिए कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार के स्तर पर पहल हो सकती है और भाजपा पर इसको लेकर लग रहे आरोपों को दरकिनार किया जा सकता है।
दूसरा विपक्षी दलों को इस मामले को लेकर हमले का मौका हाथ में जाने देने से रोकना है।ज्ञात हो कि इस साल बजट सत्र में उधमपुर के निर्दलीय विधायक पवन कुमार गुप्ता ने रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा उठाया था।
सत्र समाप्ति को छह महीने से अधिक समय हो गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। अब इस मुद्दे को भाजपा की ओर से गरमाने की तैयारी है। विहिप और चैंबर की ओर से पहले ही इनसे सुरक्षा को खतरे की आशंका जताई जा चुकी है।
कानून के तहत हो कार्रवाई : नेशनल कांफ्रेंस
पार्टी के विधायक और संभागीय प्रधान देवेंद्र राणा का कहना है कि उनकी राय में ये अनधिकृत तथा अवैध तरीके से रह रहे हैं।
यह बात केंद्र सरकार को भी पता है। म्यांमार के लोग भारतीय नागरिक नहीं हैं। पीडीपी की ओर से इस मुद्दे पर बयान देने से नेता परहेज करते रहे।