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जम्मू-कश्मीर के लिए रोहिंग्या गंभीर मसला: उपमुख्यमंत्री

Wed, 25 Jan 2017 12:03 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 25 Jan 2017 12:03 PM IST
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Rohingya issue serious for jammu kashmir: deputy cm
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह - फोटो : AMAR UJALA
उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय एक बड़ा मुद्दा बन गया है। उन्होंने अलगाववादियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे एक ओर विदेशी रोहिंग्या समुदाय को जम्मू कश्मीर में रखने के हिमायती हैं, जबकि दूसरी ओर कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी पर सवाल खड़े करते हैं। इन मुद्दों को संप्रदाय से जोड़ा जाना गलत है।
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उन्होंने कहा कि विधानसभा ने सर्वसम्मति से कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी पर प्रस्ताव पारित किया है। इससे पंडितों की घाटी वापसी की राह आसान होगी। 
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उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर घाटी अधूरी है। पंडितों की घाटी में वापसी उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। सदन में सभी सदस्यों ने स्वीकार किया है कि कश्मीरी पंडितों को सम्मान के साथ घाटी में फिर से बसाया जाना चाहिए।
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विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अलगाववादियों का इस मुद्दे पर दोहरी राय है। वे कश्मीरी पंडितों की वापसी की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें पुराने स्थलों पर बसाने की बात करते हैं। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। कश्मीरी पंडितों, सिखों और विस्थापित मुस्लिमों की वापसी सरकार के गठबंधन एजेंडे में है। 


कश्मीर में तीन-चार स्थानों पर कश्मीरी पंडितों के क्लस्टर के लिए भूमि तय की गई है। सरकार इस पर काम कर रही है। कश्मीरी पंडित सुरक्षा कारणों से अपने पुराने घरों में वापस नहीं जा सकते। इसलिए सरकार ने उन्हें क्लस्टर में बसाने की योजना बनाई है। कश्मीर में अशांति के कारण इस योजना को अब तक पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि सरकार ने अलगाववादियों के दवाब में कोई निर्णय नहीं टाला है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा इस मुद्दे का सांप्रदायिकीकरण दुर्भाग्यपूर्ण है।
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