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Jammu News: सड़क सुरक्षा में एआई तकनीक अपनाएगा जम्मू-कश्मीर
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एआई माॅडल का अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी अगले सप्ताह विभिन्न राज्यों का करेगी दौरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बढ़ते सड़क हादसों में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेगी। तेलंगाना, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के बाद अब जम्मू-कश्मीर प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा के बुद्धिमान समाधान (आई रास्ते) मॉडल की तर्ज पर एआई का उपयोग करने जा रहा है। इस तकनीक को अपनाने के लिए परिवहन विभाग ने पांच सदस्य समिति गठित की है, जो एआई मॉडल का अध्ययन कर इसे जम्मू-कश्मीर में लागू करने के लिए सिफारिश करेगी।
जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह टीम तेलंगाना राज्य में सड़क सुरक्षा उपाय के मॉडल के साथ एआई तकनीक के इस्तेमाल का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही टीम ऐसे राज्यों का भी दौरा करेगी, जो आई रास्ते मॉडल का उपयोग कर रहे हैं। सभी मॉडल का अध्ययन कर समिति जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उपयोग की जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं की रिपोर्ट बनाएगी। अगले सप्ताह पांच सदस्य टीम तेलंगाना सहित अन्य राज्यों का दौरा करने जा रही। टीम में आरटीओ कश्मीर, एआरटीओ मुख्यालय जम्मू, एआरटीओ डोडा और एआरटीओ (बीओआई यात्री) शामिल हैं। परिवहन विभाग के आयुक्त सचिव भी इस टीम के साथ उक्त राज्यों का दौरा करेंगे। समिति के अध्यक्ष व जेकेआरटीसी के एमडी राकेश सरागंल ने कहा कि कमेटी एआई तकनीक का अध्ययन करेगी, ताकि इसको जम्मू-कश्मीर में उपयोग किया जाए।
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इस तरह काम करती है एआई तकनीक
तेलंगाना सरकार ने एआई तकनीक की मदद से दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सड़कों पर ग्रे स्पॉट की वास्तविक समय निगरानी के लिए बसों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-संचालित सुरक्षा उपकरण लगाए हैं। महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना दूसरा राज्य है, जहां इसकी शुरुआत हुई है। हैदराबाद-बेंगलुरू और हैदराबाद-विजयवाड़ा मार्गों पर 200 बसों में ऐसे उपकरण लगाए हैं। यह डिवाइस दुर्घटना के संभावित क्षेत्रों पर चालक को सचेत करती है। डिवाइस में जीआईएस मानचित्रों का उपयोग किया गया है। सड़क पर समस्या वाले स्थानों की पहचान करती है और बार-बार अलर्ट देती है। साथ ही ग्रे स्पॉट की पहचान करती है। पुणे में सबसे पहले इस डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था, जहां 33 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बढ़ते सड़क हादसों में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेगी। तेलंगाना, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के बाद अब जम्मू-कश्मीर प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा के बुद्धिमान समाधान (आई रास्ते) मॉडल की तर्ज पर एआई का उपयोग करने जा रहा है। इस तकनीक को अपनाने के लिए परिवहन विभाग ने पांच सदस्य समिति गठित की है, जो एआई मॉडल का अध्ययन कर इसे जम्मू-कश्मीर में लागू करने के लिए सिफारिश करेगी।
जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह टीम तेलंगाना राज्य में सड़क सुरक्षा उपाय के मॉडल के साथ एआई तकनीक के इस्तेमाल का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही टीम ऐसे राज्यों का भी दौरा करेगी, जो आई रास्ते मॉडल का उपयोग कर रहे हैं। सभी मॉडल का अध्ययन कर समिति जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उपयोग की जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं की रिपोर्ट बनाएगी। अगले सप्ताह पांच सदस्य टीम तेलंगाना सहित अन्य राज्यों का दौरा करने जा रही। टीम में आरटीओ कश्मीर, एआरटीओ मुख्यालय जम्मू, एआरटीओ डोडा और एआरटीओ (बीओआई यात्री) शामिल हैं। परिवहन विभाग के आयुक्त सचिव भी इस टीम के साथ उक्त राज्यों का दौरा करेंगे। समिति के अध्यक्ष व जेकेआरटीसी के एमडी राकेश सरागंल ने कहा कि कमेटी एआई तकनीक का अध्ययन करेगी, ताकि इसको जम्मू-कश्मीर में उपयोग किया जाए।
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इस तरह काम करती है एआई तकनीक
तेलंगाना सरकार ने एआई तकनीक की मदद से दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सड़कों पर ग्रे स्पॉट की वास्तविक समय निगरानी के लिए बसों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-संचालित सुरक्षा उपकरण लगाए हैं। महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना दूसरा राज्य है, जहां इसकी शुरुआत हुई है। हैदराबाद-बेंगलुरू और हैदराबाद-विजयवाड़ा मार्गों पर 200 बसों में ऐसे उपकरण लगाए हैं। यह डिवाइस दुर्घटना के संभावित क्षेत्रों पर चालक को सचेत करती है। डिवाइस में जीआईएस मानचित्रों का उपयोग किया गया है। सड़क पर समस्या वाले स्थानों की पहचान करती है और बार-बार अलर्ट देती है। साथ ही ग्रे स्पॉट की पहचान करती है। पुणे में सबसे पहले इस डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था, जहां 33 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई थी।
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