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गर्मी में सावधान : चालीस डिग्री पार पहुंचे पारे से हीट स्ट्रोक का खतरा, अस्पतालों में उल्टी-दस्त के बढ़े मरीज

Sat, 30 Apr 2022 01:18 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 30 Apr 2022 01:18 PM IST
सार

जम्मू संभाग में लगातार गर्मी बढ़ने लगी है। इसका असर अस्पतालों पर भी दिखने लगा है। उल्टी दस्त से प्रभावित मरीज लगातार अलग-अलग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि लगातार बढ़ रही गर्मी से सभी को बचना चाहिए। 

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risk of heat stroke in the mercury crossed forty degrees
जम्मू में धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करतीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू में रिकॉर्ड तोड़ पारे के बीच हीट (सन) स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। आसमान में बरस रही आग से हर किसी का हाल बेहाल है। सबसे ज्यादा खुले में घंटों काम करने वाले अधिक प्रभावित हैं। इस समय गेहूं की कटाई भी चल रही है, जिसमें ग्रामीण कड़ी धूप में कटाई कर रहे हैं। लेकिन तापमान के लगातार 40 डिग्री के ऊपर रहने से हीट स्ट्रोक जान ले सकता है। इसके साथ अस्पतालों में डिहाइड्रेशन (उल्टी-दस्त) के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। 
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व्यक्ति के शरीर में 97-98 डिग्री तक तापमान सामान्य होता है

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरदीप का कहना है कि घंटों तक तेज धूप में रहने से शरीर में अचानक सामान्य से कई गुणा अधिक तापमान हो जाता है। इससे दिमाग में थर्मों रेगुलेटर सेंटर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और हीट स्ट्रोक के कारण जान भी जा सकती है। व्यक्ति के शरीर में 97-98 डिग्री तक तापमान सामान्य होता है।
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घंटों तक तेज धूप में खड़े रहने से हो सकती है परेशानी 

दिमाग में थ्रमो रेगुलेटर सेंटर कितनी भी तापमान में चले जाने पर शरीर के भीतरी हिस्सों को ठंडा रखने का काम करता है। इस प्रक्रिया में शरीर में पसीने के साथ कई तरस पदार्थ बाहर छोड़ता रहता है। यह सेंटर एक सेंसर की तरह काम करता है जो तापमान के मुताबिक खुद ही शरीर के प्रमुख हिस्सों को काम करने के निर्देश देता है। लेकिन घंटों तक तेज धूप में रहने पर यह सेंसर गड़बड़ा जाता है।
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असामान्य तापमान से शरीर की सारी गतिविधियां प्रभावित होती हैं 

इससे शरीर के सभी प्रमुख हिस्सों में असामान्य तापमान से सारी गतिविधियां प्रभावित होती हैं। कई बार पीड़ित को 106 डिग्री तक हाईग्रेड बुखार हो जाता है। अमूमन लगातार 40-45 डिग्री तापमान रहने पर ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं। हीट स्ट्रोक के बाद पीड़ित को तत्काल उचित उपचार न मिलने से उसकी जान चली जाती है। शारीरिक क्षमता से कमजोर व्यक्ति जल्दी चपेट में आते है। हीट स्ट्रोक में शरीर में पानी की मात्रा काफी कम हो जाती है। 

लक्षण

  1. सीधी धूप लेने पर अचानक चक्कर खाकर गिर जाना
  2. ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित का बेसुध हो जाना 
  3. पीड़ित में काफी देर तक बेहोशी छाए रहना
बचाव 
  • हीट स्ट्रोक होने पर पीड़ित को जल्द ठंडी और छायादार जगह पर पहुंचाएं
  • पीड़ित के शरीर के तापमान की जांच करें
  • बेहोशी होने पर मुंह में थर्मामीटर न डालें
  • काम करते समय सिर को कपड़े से ढककर रखें
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