{"_id":"6a234c5a4e0bb51e3c0e651d","slug":"retirement-court-salary-jammu-news-c-10-jmu1062-930934-2026-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: सेवानिवृत्ति के आदेश के बाद भी वेतन का किया दावा, खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: सेवानिवृत्ति के आदेश के बाद भी वेतन का किया दावा, खारिज
विज्ञापन
जम्मू। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने श्रीनगर और अनंतनाग के मास्टर व जोनल प्लान तैयार करने के लिए ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को मार्च 2020 तक वेतन देने के एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि नौकरी की अवधि बढ़ाने का आदेश रिकॉर्ड में नहीं है और कर्मचारी यह साबित नहीं कर पाए कि उन्होंने तय अवधि खत्म होने के बाद काम किया था। सरकार की अपील मंजूर करते हुए कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
वर्ष 2017-18 में विशेषज्ञों को ठेके पर रखा गया था। श्रीनगर में कार्यरत कर्मचारियों का कार्यकाल 31 अगस्त 2019 तक बढ़ाया गया था जबकि अनंतनाग में जून 2019 में समाप्त हुआ था। तय अवधि तक सभी को वेतन मिला था। कर्मचारियों का कहना था कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी 20 मार्च 2020 तक काम करते रहे लेकिन वेतन नहीं मिला। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए वेतन जारी करने का आदेश दिया था।
सरकार ने आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत को ऐसे सर्कुलर दिखाए गए जिनमें सेवाएं वर्ष 2019 में ही समाप्त करने की बात कही गई थी। सर्कुलर में विभाग का रिकॉर्ड, डेटा और दिए गए उपकरण वापस करने के निर्देश दिए गए थे। डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारी यह साबित नहीं कर सके कि कार्यकाल खत्म होने के बाद वास्तव में कोई काम किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2017-18 में विशेषज्ञों को ठेके पर रखा गया था। श्रीनगर में कार्यरत कर्मचारियों का कार्यकाल 31 अगस्त 2019 तक बढ़ाया गया था जबकि अनंतनाग में जून 2019 में समाप्त हुआ था। तय अवधि तक सभी को वेतन मिला था। कर्मचारियों का कहना था कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी 20 मार्च 2020 तक काम करते रहे लेकिन वेतन नहीं मिला। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए वेतन जारी करने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
सरकार ने आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत को ऐसे सर्कुलर दिखाए गए जिनमें सेवाएं वर्ष 2019 में ही समाप्त करने की बात कही गई थी। सर्कुलर में विभाग का रिकॉर्ड, डेटा और दिए गए उपकरण वापस करने के निर्देश दिए गए थे। डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारी यह साबित नहीं कर सके कि कार्यकाल खत्म होने के बाद वास्तव में कोई काम किया था।
विज्ञापन