{"_id":"a8ae451e5b34a1b392be70c24633da4f","slug":"ret-teachers-demonstrate-for-salary-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"रहबर-ए-तालीम शिक्षकों ने किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रहबर-ए-तालीम शिक्षकों ने किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Mon, 11 May 2015 01:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रहबर-ए-तालीम शिक्षकों ने सरकार को दो टूक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि जल्द वेतन न मिला तो वह स्कूलों पर ताला जड़ देंगे। कठुआ के शहीद भगत सिंह पार्क में एक दिवसीय अधिवेशन के उपरांत ऑल जम्मू कश्मीर रहबर-ए- तालीम टीचर्स फोरम ने अपनी मांगों के समर्थन और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
सैकड़ों की तादाद में एकत्रित फोरम सदस्यों ने कहा कि एक साल से वेतन नहीं दिया जा रहा है। बिना वेतन अब वह और सेवा नहीं दे पाएंगे। लिहाजा उन्हें वेतन नहीं दिया गया तो वह स्कूलों पर ताले लगाकर बेमियादी विरोध शुरू कर देंगे। फोरम के प्रदेश अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि रहबर-ए-तालीम शिक्षकों की नियुक्ति बाकायदा नियमों के अनुसार हुई है।
उनकी शैक्षिक योग्यता परखने के बाद ही नियुक्ति हुई है। ऐसे में सरकार यदि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों को दोयम दर्जे का शिक्षक घोषित करने पर तुली हुई है तो इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों ने रियासत में बंद पड़े 770 स्कूलों को न सिर्फ फिर से खुलवाया है बल्कि उन्हें ठीक से चलाया भी है। सुदूरवर्ती इलाकों में शिक्षा को घर घर पहुंचाने का काम कर रहे शिक्षकों पिछले एक वर्ष से वेतन नहीं दिया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल महेश कुमार, पंकज वर्मा, सुशील वर्मा, पंकज शर्मा, अजित, पवन शर्मा, राकेश सिंह और बरिंदर सिंह ने कहा कि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है।
एक वर्ष से वेतन नहीं दिया गया है जबकि स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था संभालने के अलावा मिड डे मील योजना चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। शिक्षक जरूरतमंद बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके अपने बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
विज्ञापन
सैकड़ों की तादाद में एकत्रित फोरम सदस्यों ने कहा कि एक साल से वेतन नहीं दिया जा रहा है। बिना वेतन अब वह और सेवा नहीं दे पाएंगे। लिहाजा उन्हें वेतन नहीं दिया गया तो वह स्कूलों पर ताले लगाकर बेमियादी विरोध शुरू कर देंगे। फोरम के प्रदेश अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि रहबर-ए-तालीम शिक्षकों की नियुक्ति बाकायदा नियमों के अनुसार हुई है।
विज्ञापन
उनकी शैक्षिक योग्यता परखने के बाद ही नियुक्ति हुई है। ऐसे में सरकार यदि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों को दोयम दर्जे का शिक्षक घोषित करने पर तुली हुई है तो इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों ने रियासत में बंद पड़े 770 स्कूलों को न सिर्फ फिर से खुलवाया है बल्कि उन्हें ठीक से चलाया भी है। सुदूरवर्ती इलाकों में शिक्षा को घर घर पहुंचाने का काम कर रहे शिक्षकों पिछले एक वर्ष से वेतन नहीं दिया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल महेश कुमार, पंकज वर्मा, सुशील वर्मा, पंकज शर्मा, अजित, पवन शर्मा, राकेश सिंह और बरिंदर सिंह ने कहा कि रहबर-ए- तालीम शिक्षकों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है।
एक वर्ष से वेतन नहीं दिया गया है जबकि स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था संभालने के अलावा मिड डे मील योजना चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। शिक्षक जरूरतमंद बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके अपने बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।