कश्मीरः श्रीनगर में रही कर्फ्यू जैसी पाबंदियां
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श्रीनगर में शुक्रवार को ट्रक कंडक्टर ज़ाहिद की मौत को लेकर जुमा की निमाज के बाद लोगों से प्रदर्शन करने की अपील की थी। अलगाववादियों की इस कॉल को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
जगह जगह पर सुरक्षाबलों की तैनाती भारी संख्या में की गई थी ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। इसके इलावा श्रीनगर के पुराने शहर के 7 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू जैसी स्थिति लागू की गई थी जिनमें माईसुमा, सफकदल, महाराज गंज, नौहट्टा, खान्यार, क्त्रसलखुड़ और रैनवारी शामिल थे।
इन थानों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में सड़कों पर कंटीली तारें बिछाई गई थी और लोगों को भी घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन इन सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद भी श्रीनगर के कईं इलाकों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले।
पुराने शहर के नौहट्टा, नवाब बाज़ार, खान्यार, नौगाम, हब्बाकदल, माईसुमा आदि इलाकों में दिन भर हलकी झड़पें देखने को मिली लेकिन शाम होते ही माईसुमा और हब्बाकदल इलाके में ज़बरदस्त झड़पें शुरू हुई।
नहीं पढ़ी गई जुमे की नमाज
प्रदर्शनकारियों द्वारा जमकर पत्थरबाजी की गई जिसके जवाब में स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले भी दागे गए।
मिली जानकारी के अनुसार पुलिस द्वारा माईसुमा और हब्बाकदल से करीब एक दर्जन युवाओं को पत्थरबाज़ी के आरोप में हिरासत में लिया है। इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 8 लोगों के घायल होने की खबर है जिनमें से 3 सुरक्षाबलों के जवान भी हैं।
वहीँ शुक्रवार को नौहट्टा इलाके में स्थित एतिहासिक जामिया मस्जिद में जुमे की निमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। मीरवाइज मोलवी उमर फारूक जो हर जुमा को मस्जिद में नमाज पढ़ाते हैं उन्हे नज़रबंद किया गया था।
क्योंकि उनके द्वारा नमाज के बाद कश्मीरी ट्रक कंडक्टर की मौत को लेकर धरना प्रदर्शन करने का आह्वाहन किया था जिसके लिए उन्होने सईद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक को भी आमंत्रित किया था लेकिन पुलिस द्वारा उन्हे और अन्य कईं अलगाववादियों को पहले से ही नज़रबंद किया गया था।