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Jammu News: आत्मा अजर-अमर, संकल्प-विकल्प से परे
Mon, 07 Aug 2023 01:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 07 Aug 2023 01:30 AM IST
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जम्मू। साहिब बंदगी के सद्गुरु मधुपरमहंस महाराज ने रविवार को साहिब बंदगी आश्रम में प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि अमर लोक में सबकी अमर काया है। निरंजन को अकाल भी कहा है। उन्होंने कहा कि शास्त्रकारों ने कम से कम यह तो लिख दिया कि यह अमर है, जन्म नहीं लेती, मरती नहीं, किसी भी देश काल में इसका नाश नहीं होता है। स्त्री भी नहीं है, पुरुष भी नहीं है। अजन्मा है। सही बात है। जब आत्मा परमात्मा का अंश है तो उसके पास भी यही चीज है। वहां भय नहीं है। आत्मा संकल्प विकल्प से परे है।
सद्गुरु ने कहा कि संतों ने अन्य भक्तियों पर विराम लगाकर उस परम पुरुष की भक्ति की। इसलिए तो विरोध हुआ। पूरी दुनिया काल पुरुष की भक्ति में उलझी है। कबीर साहिब कह रहे हैं कि जो आत्मा का अंशी है, हमारा रक्षक है, उसको कोई नहीं जानता है। जो भक्षक है, उसी में सब उलझे हैं। सन् 1500 से 1800 तक जो काल था, वो संत काल कहलाया। देश में एक ऐसी लहर उठी थी कि सभी उस परम पुरुष की भक्ति करने लगे थे। इसलिए संतों की घोर विरोध हुआ। अगर आप शास्त्र उठाकर देखेंगे तो संत शब्द कहीं नहीं मिलता है। सिद्ध मिलता है, योगी मिलता है, ऋषि-मुनि मिलता है, पर लिखित कहीं संत शब्द नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में मनुष्य ही नहीं, जीव-जन्तु, कीड़े आदि सब सुख की प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं। मगर कबीर साहिब कह रहे हैं कि सच्चा सुख आत्मा के उस अपने अमर लोक पर है।
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सद्गुरु ने कहा कि संतों ने अन्य भक्तियों पर विराम लगाकर उस परम पुरुष की भक्ति की। इसलिए तो विरोध हुआ। पूरी दुनिया काल पुरुष की भक्ति में उलझी है। कबीर साहिब कह रहे हैं कि जो आत्मा का अंशी है, हमारा रक्षक है, उसको कोई नहीं जानता है। जो भक्षक है, उसी में सब उलझे हैं। सन् 1500 से 1800 तक जो काल था, वो संत काल कहलाया। देश में एक ऐसी लहर उठी थी कि सभी उस परम पुरुष की भक्ति करने लगे थे। इसलिए संतों की घोर विरोध हुआ। अगर आप शास्त्र उठाकर देखेंगे तो संत शब्द कहीं नहीं मिलता है। सिद्ध मिलता है, योगी मिलता है, ऋषि-मुनि मिलता है, पर लिखित कहीं संत शब्द नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में मनुष्य ही नहीं, जीव-जन्तु, कीड़े आदि सब सुख की प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं। मगर कबीर साहिब कह रहे हैं कि सच्चा सुख आत्मा के उस अपने अमर लोक पर है।
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