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Jammu News: शिव-पार्वती विवाह की झांकी निकाली, भाव-विभोर हुए भक्त
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आचार्य सूरज दास ने श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति का मार्ग दिखाया
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। कृष्णा स्पोर्ट्स क्लब खौड़ में श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को शिव-पार्वती विवाह की झांकी निकाली गई। इसमें शामिल होकर श्रद्धालु भाव-विभाेर हो उठे।
आचार्य महंत सूरज दास शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि प्रभु भक्ति के बिना मनुष्य जीवन अधूरा है। इंसान को भक्ति में मन लगाना चाहिए। आज इंसान भक्ति छोड़कर मोह-माया के लोभ में फंसता जा रहा है। हर दिन अपने कुछ पल प्रभु भक्ति में भी मन लगाना चाहिए। प्रभु का नाम जुबान पर नहीं मन में होना चाहिए। झूठ, धोखा और लालच से दूर रहकर जीवन को सच्ची राह पर ले जाएंगे तब जाकर जीवन सफल होगा। घृणा से दूर रहकर सभी से प्रेम करें। किसी की सफलता पर दुख नहीं रीस कर आगे बढ़ें। शुक्रवार को तीसरे दिन कथा में कथावाचक ने भगवान शिव के विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह होने वाला था तो एक बड़ी सुंदर घटना हुई। उनकी शादी बहुत ही भव्य पैमाने पर हो रही थी। इससे पहले ऐसी शादी कभी नहीं हुई। जिस समय शिव की शादी हुई तो वह तपस्या में लीन थे। सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई। भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया लेकिन वह भस्म हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर शिव पार्वती से विवाह करने के लिए राजी हुए। कथा 20 जनवरी तक जारी रहेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। कृष्णा स्पोर्ट्स क्लब खौड़ में श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को शिव-पार्वती विवाह की झांकी निकाली गई। इसमें शामिल होकर श्रद्धालु भाव-विभाेर हो उठे।
आचार्य महंत सूरज दास शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि प्रभु भक्ति के बिना मनुष्य जीवन अधूरा है। इंसान को भक्ति में मन लगाना चाहिए। आज इंसान भक्ति छोड़कर मोह-माया के लोभ में फंसता जा रहा है। हर दिन अपने कुछ पल प्रभु भक्ति में भी मन लगाना चाहिए। प्रभु का नाम जुबान पर नहीं मन में होना चाहिए। झूठ, धोखा और लालच से दूर रहकर जीवन को सच्ची राह पर ले जाएंगे तब जाकर जीवन सफल होगा। घृणा से दूर रहकर सभी से प्रेम करें। किसी की सफलता पर दुख नहीं रीस कर आगे बढ़ें। शुक्रवार को तीसरे दिन कथा में कथावाचक ने भगवान शिव के विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह होने वाला था तो एक बड़ी सुंदर घटना हुई। उनकी शादी बहुत ही भव्य पैमाने पर हो रही थी। इससे पहले ऐसी शादी कभी नहीं हुई। जिस समय शिव की शादी हुई तो वह तपस्या में लीन थे। सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई। भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया लेकिन वह भस्म हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर शिव पार्वती से विवाह करने के लिए राजी हुए। कथा 20 जनवरी तक जारी रहेगी।
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