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Jammu News: रामलीला में भाईचारे का संदेश, अधर्म के अंत की झलक
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पंजतीर्थी स्थित बिल्लू मंदिर रामलीला मंचन के दौरान अपनी प्रस्तुति देते हुए कलाकार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। शहर के पंजतीर्थी स्थित बिल्लू मंदिर में रामलीला ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार रात कलाकारों ने भरत मिलाप और शूर्पनखा प्रसंग का मंचन कर दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से रूबरू करवाया।
मंच पर कहीं भाइयों के बीच प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना दिखाई दी तो कहीं शूर्पनखा प्रसंग के माध्यम से रामायण की कथा ने नया मोड़ लिया। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को प्रसंगों से जोड़ने का प्रयास किया। भरत मिलाप प्रसंग में भगवान श्रीराम और भरत के मिलन के माध्यम से पारिवारिक एकता, त्याग और मर्यादा का संदेश दिया गया। शूर्पनखा प्रसंग में कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण की घटनाओं को मंच पर जीवंत किया।
दोनों प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों के सामने रामायण के भावनात्मक और घटनाप्रधान पक्ष को रखा। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मर्यादा की सीख भी मिलती है। पंजतीर्थी में आयोजित मंचन इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। रामायण के प्रसंगों को संवादों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर कलाकार दर्शकों तक इनकी प्रासंगिकता पहुंचा रहे हैं।
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जम्मू। शहर के पंजतीर्थी स्थित बिल्लू मंदिर में रामलीला ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार रात कलाकारों ने भरत मिलाप और शूर्पनखा प्रसंग का मंचन कर दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से रूबरू करवाया।
मंच पर कहीं भाइयों के बीच प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना दिखाई दी तो कहीं शूर्पनखा प्रसंग के माध्यम से रामायण की कथा ने नया मोड़ लिया। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को प्रसंगों से जोड़ने का प्रयास किया। भरत मिलाप प्रसंग में भगवान श्रीराम और भरत के मिलन के माध्यम से पारिवारिक एकता, त्याग और मर्यादा का संदेश दिया गया। शूर्पनखा प्रसंग में कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण की घटनाओं को मंच पर जीवंत किया।
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दोनों प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों के सामने रामायण के भावनात्मक और घटनाप्रधान पक्ष को रखा। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मर्यादा की सीख भी मिलती है। पंजतीर्थी में आयोजित मंचन इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। रामायण के प्रसंगों को संवादों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर कलाकार दर्शकों तक इनकी प्रासंगिकता पहुंचा रहे हैं।
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