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J&K Terrorist: पाकिस्तान से था कनेक्शन, लश्कर हैंडलर रऊफ की जमानत याचिका खारिज, नारको आतंक से जोड़े गए तार

Sun, 10 Aug 2025 11:26 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sun, 10 Aug 2025 11:26 AM IST
सार

लश्कर हैंडलर अब्दुल रऊफ बदन की जमानत याचिका एनआईए की विशेष अदालत ने गंभीर आरोपों और अधूरी जांच के चलते खारिज कर दी। उस पर नारको आतंकवाद से धन जुटाकर संपत्ति खरीदने और पाकिस्तान स्थित आतंकियों से जुड़े होने का आरोप है।
 

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Refusal to grant bail to Lashkar handler Rauf
NIA - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत जम्मू ने लश्कर के हैंडलर अब्दुल रऊफ बदन उर्फ मोटू की जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने याचिका खारिज करते हुए अपराध की गंभीरता, जांच, मोबाइल संचार, वित्तीय लेनदेन और गवाहों के बयानों सहित सबूतों की संवेदनशील प्रकृति का हवाला दिया। यह ध्यान दिया गया कि अभियुक्त के विरुद्ध 30 महत्वपूर्ण गवाहों की अभी जांच होनी बाकी है। इस समय जमानत देने से अभियोजन पक्ष का मामला खतरे में पड़ सकता है।

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विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि बदन पाकिस्तान स्थित संचालकों से जुड़े लश्कर नेटवर्क का एक प्रमुख कड़ी था जिसे नशीले पदार्थों की तस्करी के बदले बड़ी रकम मिली थी। एनआईए ने इसके सह अभियुक्त अब्दुल मोमिन पीर और सलीम अंद्राबी के साथ उसके संबंधों की जानकारी दी। दावा किया कि बदन ने मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त आय से संपत्ति खरीदी है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि उसके विरुद्ध मामला मनगढ़ंत है।
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उसके पास से कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या बरामदगी नहीं हुई है। हालांकि अदालत ने माना कि यूएपीए और एनडीपीएस अधिनियमों के तहत मामलों में जमानत की सीमा अधिक होती है। अदालत को यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोप प्रथम दृष्टया सत्य नहीं हैं, जो इस मामले में पूरा नहीं हुआ।
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2022 में किया था गिरफ्तार एनआईए ने 2022 में कुपवाड़ा के रहने वाले बदन को गिरफ्तार किया था। बदन उस मामले का वांछित था। जिसमें पहले से 11 लोग नारको आतंकवाद के मामले में गिरफ्तार जाए चुके थे। हंदबाड़ा पुलिस थाने में 2020 में केस दर्ज हुआ था।

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