जम्मू-कश्मीर पांच अगस्त से अबतक, प्रीपेड मोबाइल सेवा बंद होने से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में आई कमी
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पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से घाटी में सेना का आतंकियों के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण घाटी में प्रीपेड सेवाओं और इंटरनेट का न चलना है। इंटरनेट न चलने की वजह से आतंकियों के मूवमेंट की कोई खबर सुरक्षा एजेंसियों को नहीं लग पा रही है।
सूत्रों के अनुसार इंटरनेट चलनने से आंतकियों के मूवमेंट की सूचना सर्विलांस से सुरक्षा एजेंसियों को पता चल जाती। बता दें कि शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग में जहां पांच अगस्त से पहले सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों को पकड़ने में एक के बाद एक बड़ी सफलता मिल रही थी। चार अगस्त से पहले शोपियां में आतंकियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। इसमें कई आतंकी मारे गए।
सूत्रों के अनुसार शोपियां में अगस्त से पहले 17 ऑपरेशन हुए। इसमें 39 आतंकी मारे गए। इसके अलावा अनंतनाग में भी नौ से ज्यादा ऑपरेशन में एक दर्जन से ज्यादा आतंकी मार गिराए गए। वहीं कुलगाम में हुए चार ऑपरेशनों में दस से ज्यादा मिलिटेंट मारे गए थे। पुलवामा में भी इस वर्ष सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के खिलाफ बड़ी सफलताएं मिलीं।
प्रीपेड मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करते थे आतंकी
पांच अगस्त के बाद अगर देखा जाए तो अवंतीपोरा मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर हुए, वह पांच अगस्त के बाद का पहला ऑपरेशन था जिसमें पुलिस ने दो आतंकी को मार गिराए। वहीं अनंतनाग के बिजबिहाड़ा के पजलपुरा में भी कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर सुरक्षा एजेंसियों ने घेराबंदी की थी और दो आंतकियों को मार गिराया था।
इसके अलावा तीसरा ऑपरेशन अवंतीपोरा के त्राल में हुआ। यहां एक घर में छिपे दो आतंकियों को मार गिराया गया। वहीं पुलवामा जिले में सेना की टुकड़ी पर हमला बोलने के बाद जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी भी ढेर हुए थे।
सूत्रों के अनुसार घाटी में प्रीपेड मोबाइल सेवा बंद होने के बाद से ही आतंकी ऑपरेशनों में कमी आई है। माना जाता है कि आतंकी प्रीपेड मोबाइल सेवा का ज्यादा इस्तेमाल करते थे। फोन इस्तेमाल करने से ही आतंकियों की लोकेशन ट्रेस होती थी और नेस बेसिस इंटरसेप्शन से भी सुरक्षा एजेंसियों को उनकी खबर मिल जाती थी।
आतंकियों के ठिकाने बदलने की आशंका
प्रीपेड मोबाइल सेवा बंद होने कारण आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में रोक लगी है। हालांकि, एजेंसियां आतंकियों की तलाश में सर्च अभियान चलाती रहती हैं।
पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहला चैलेंज घाटी के माहौल को सामान्य करना था।
सूत्रों के अनुसार मोबाइल सेवा बंद होने से घाटी में आतंकियों की लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी। सेना अधिकारियों ने आशंका जाहिर की है कि इसका फायदा उठाकर आतंकी अपना ठिकाना बदल सकते हैं।