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पढ़िए, प्रिंसिपल कमिश्नर आयकर का स्पेशल इंटरव्यू
ब्यूरो/ अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:49 PM IST
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छह माह पहले आयकर की प्रिंसिपल कमिश्नर (जम्मू कश्मीर) का पद संभालने वाली संगीता गुप्ता आयकर रिटर्न न भरने वालों में चर्चा का विषय बनी हुईं हैं। 54 हजार लोगों को आयकर नोटिस जारी करने के अलावा विरोध के बावजूद कश्मीर घाटी के बारामुला में आयकर कार्यालय खोलने वालीं संगीता लोगों में कड़क अफसर के नाम से मशहूर हैं। छह माह में तीन नए कार्यालय खोल उन्होंने अपने इरादे जता दिए। अगला कार्यालय जल्द ही राजोरी में खुलेगा। रियासत में आयकर की नई संभावनाओं और वर्तमान वित्तीय वर्ष के अगले तीन माह की संभावित गतिविधियों पर प्रिंसिपल कमिश्नर से अमर उजाला के संवाददाता भूपेंदर सिंह भाटिया ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :
सूट करती है कड़क छवि
त्वरित और कड़ी कार्रवाई के कारण आयकर बचाने वालों में डर पैदा करने वाली संगीता गुप्ता का कहना है कि वह सिर्फ अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रही हैं। सरकार उन्हें वेतन देती है और उन्हें अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना है। आयकर दाता की श्रेणी में आने के बावजूद जो लोग आयकर रिटर्न तक नहीं भरते हैं, उनके खिलाफ अभियान जारी रहेगा। यदि कोई इसी कारण उन्हें कड़क छवि वाला कहता है तो मुझे यह छवि सूट करती है। उनका कहना है कि वह नेता नहीं हैं और न ही वोट लेने के लिए यहां आईं हैं। लोग अपना आयकर रिटर्न सही भरें, विभाग उन्हें सहयोग करेगा। उनका कहना है कि लोग सौ रुपये आयकर देते हैं तो बदले में केंद्र 125 रुपये रियासत को विकास के लिए देता है, जबकि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं है।
कश्मीर में ज्यादा नोटिस जारी हुए
आयकर विभाग पर अक्सर आरोप लगता है कि अफसर जम्मू के प्रति कड़क और कश्मीर के प्रति नरम रवैया अपनाते हैं, लेकिन प्रिंसिपल कमिश्नर इसे सिरे से नकारती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जिन 54 हजार लोगों को नोटिस जारी किए, उनमें 30 हजार घाटी के हैं। चंद दिन पहले उन्होंने श्रीनगर में दो सर्वे किए और ढाई करोड़ रुपये वसूले। बारामुला में लोगों के विरोध के कारण विभाग आज तक कार्यालय नहीं खोल सका था। उन्हें भी कार्यालय खोलने से रोका गया। कई बाधाएं डालीं गईं। उन्हें डर था कि कार्यालय खुलने से वह आयकर की पैनी नजर में रहेंगे, लेकिन आज वहां कार्यालय खुल गया है। लोगों को ही उससे सुविधा हुई है। अब उन्हें श्रीनगर रिटर्न भरने नहीं जाना पड़ता। पहले श्रीनगर में रिकवरी के नोटिस जारी होते थे, लेकिन रिकवरी नहीं होती थी, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में कश्मीर घाटी का राजस्व ग्राफ ऊंचा होगा। प्रिंसिपल कमिश्नर कहती हैं कि सरकारी अफसरों में रिटर्न नहीं भरने की प्रवृत्ति है, जबकि उनके वेतन से आयकर कटता है। उन्होंने तमाम डीडीओ को 300 से ज्यादा पत्र लिखे हैं, जो सरकारी मुलाजिमों के आयकर का काम देखते हैं। उन्हें आयकर रिटर्न भरवाना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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तीन साल में बनेगा श्रीनगर में अपना कार्यालय
श्रीनगर या घाटी में पोस्टिंग के लिए नाम आते ही आयकर अधिकारी परेशान हो जाते हैं, जबकि श्रीनगर में उन्हें रहने और खाने की मुफ्त सुविधा विभाग की ओर से मुहैया करवाई जाती है। अब विभाग ने वहां अपनी कालोनी बनाने का फैसला किया है। संगीता गुप्ता कहती है कि श्रीनगर में 27 कनाल जमीन ली गई है। जहां विशाल कार्यालय के अलावा रिहायशी फ्लैट बनेंगे, ताकि घाटी में नियुक्त होने वाले अफसरों को अच्छे वातावरण में रहने की सुविधा मिल सके। एनबीसीसी कंपनी ने निर्माण शुरू कर दिया है। अगले तीन साल में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
गलत रिटर्न भरने वालों की सूची तैयार करता है कंप्यूटर
प्रिंसिपल कमिश्नर के अनुसार रिटर्न न भरने वाले या गलत जानकारी देने वालों की सूची कंप्यूटर तैयार करता है। विभाग के पास ऐसा साफ्टवेयर है, जो लोगों के रिटर्न या उनके बैंक अकाउंट और अन्य जानकारियों से तय कर देता है कि किसी शख्स ने अपनी रिटर्न में कम जानकारी दी है। यह काम कंप्यूटर पर अचानक किया जाता है, जिसमें किसी का भी नाम आ जाता है। उन लोगों से संबंधित जानकारी की विभागीय अधिकारी समीक्षा करते हैं और उन्हें नोटिस जारी करते हैं। अकसर लोग नोटिस का जवाब नहीं देते। उसके बाद विभाग को मजबूरन कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके संस्थानों पर सर्वे और बैंक खाते तक सील करने पड़ते हैं।
कवि और कलाकार भी हैं संगीता
काम के प्रति कड़क रवैये से जानी जाने वाली प्रिंसिपल कमिश्नर संगीता गुप्ता के पास एक कवि का कोमल हृदय भी है। वह कविताएं भी लिखती हैं। इसके अलावा डॉक्यूमेंट्री बनाने और पेंटिंग भी उनका शौक है। उनकी कविताओं की नौ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, इनका अंग्रेजी, बांग्ला और जर्मन में अनुवाद भी हो चुका है।
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सूट करती है कड़क छवि
त्वरित और कड़ी कार्रवाई के कारण आयकर बचाने वालों में डर पैदा करने वाली संगीता गुप्ता का कहना है कि वह सिर्फ अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रही हैं। सरकार उन्हें वेतन देती है और उन्हें अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना है। आयकर दाता की श्रेणी में आने के बावजूद जो लोग आयकर रिटर्न तक नहीं भरते हैं, उनके खिलाफ अभियान जारी रहेगा। यदि कोई इसी कारण उन्हें कड़क छवि वाला कहता है तो मुझे यह छवि सूट करती है। उनका कहना है कि वह नेता नहीं हैं और न ही वोट लेने के लिए यहां आईं हैं। लोग अपना आयकर रिटर्न सही भरें, विभाग उन्हें सहयोग करेगा। उनका कहना है कि लोग सौ रुपये आयकर देते हैं तो बदले में केंद्र 125 रुपये रियासत को विकास के लिए देता है, जबकि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं है।
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कश्मीर में ज्यादा नोटिस जारी हुए
आयकर विभाग पर अक्सर आरोप लगता है कि अफसर जम्मू के प्रति कड़क और कश्मीर के प्रति नरम रवैया अपनाते हैं, लेकिन प्रिंसिपल कमिश्नर इसे सिरे से नकारती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जिन 54 हजार लोगों को नोटिस जारी किए, उनमें 30 हजार घाटी के हैं। चंद दिन पहले उन्होंने श्रीनगर में दो सर्वे किए और ढाई करोड़ रुपये वसूले। बारामुला में लोगों के विरोध के कारण विभाग आज तक कार्यालय नहीं खोल सका था। उन्हें भी कार्यालय खोलने से रोका गया। कई बाधाएं डालीं गईं। उन्हें डर था कि कार्यालय खुलने से वह आयकर की पैनी नजर में रहेंगे, लेकिन आज वहां कार्यालय खुल गया है। लोगों को ही उससे सुविधा हुई है। अब उन्हें श्रीनगर रिटर्न भरने नहीं जाना पड़ता। पहले श्रीनगर में रिकवरी के नोटिस जारी होते थे, लेकिन रिकवरी नहीं होती थी, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में कश्मीर घाटी का राजस्व ग्राफ ऊंचा होगा। प्रिंसिपल कमिश्नर कहती हैं कि सरकारी अफसरों में रिटर्न नहीं भरने की प्रवृत्ति है, जबकि उनके वेतन से आयकर कटता है। उन्होंने तमाम डीडीओ को 300 से ज्यादा पत्र लिखे हैं, जो सरकारी मुलाजिमों के आयकर का काम देखते हैं। उन्हें आयकर रिटर्न भरवाना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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तीन साल में बनेगा श्रीनगर में अपना कार्यालय
श्रीनगर या घाटी में पोस्टिंग के लिए नाम आते ही आयकर अधिकारी परेशान हो जाते हैं, जबकि श्रीनगर में उन्हें रहने और खाने की मुफ्त सुविधा विभाग की ओर से मुहैया करवाई जाती है। अब विभाग ने वहां अपनी कालोनी बनाने का फैसला किया है। संगीता गुप्ता कहती है कि श्रीनगर में 27 कनाल जमीन ली गई है। जहां विशाल कार्यालय के अलावा रिहायशी फ्लैट बनेंगे, ताकि घाटी में नियुक्त होने वाले अफसरों को अच्छे वातावरण में रहने की सुविधा मिल सके। एनबीसीसी कंपनी ने निर्माण शुरू कर दिया है। अगले तीन साल में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
गलत रिटर्न भरने वालों की सूची तैयार करता है कंप्यूटर
प्रिंसिपल कमिश्नर के अनुसार रिटर्न न भरने वाले या गलत जानकारी देने वालों की सूची कंप्यूटर तैयार करता है। विभाग के पास ऐसा साफ्टवेयर है, जो लोगों के रिटर्न या उनके बैंक अकाउंट और अन्य जानकारियों से तय कर देता है कि किसी शख्स ने अपनी रिटर्न में कम जानकारी दी है। यह काम कंप्यूटर पर अचानक किया जाता है, जिसमें किसी का भी नाम आ जाता है। उन लोगों से संबंधित जानकारी की विभागीय अधिकारी समीक्षा करते हैं और उन्हें नोटिस जारी करते हैं। अकसर लोग नोटिस का जवाब नहीं देते। उसके बाद विभाग को मजबूरन कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके संस्थानों पर सर्वे और बैंक खाते तक सील करने पड़ते हैं।
कवि और कलाकार भी हैं संगीता
काम के प्रति कड़क रवैये से जानी जाने वाली प्रिंसिपल कमिश्नर संगीता गुप्ता के पास एक कवि का कोमल हृदय भी है। वह कविताएं भी लिखती हैं। इसके अलावा डॉक्यूमेंट्री बनाने और पेंटिंग भी उनका शौक है। उनकी कविताओं की नौ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, इनका अंग्रेजी, बांग्ला और जर्मन में अनुवाद भी हो चुका है।